दमोह के मलैया मिल रेलवे फाटक पर बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य पर रोक लग गई है। जिससे सड़क मार्ग अवरूद्ध है साथ ही 15 लाख रुपए महीने किराए पर लाई गई ड्रिल मशीन भी खड़ी है, क्योंकि एक बार इसे असेंबल करने के बाद निकाला नहीं जा सकता। एक कालोनाइजर के द्वारा आपत्ति लगाने के बाद इसके निर्माण कार्य पर हाईकोर्ट से स्टे लगा है। यह 30 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद अगला निर्णय लिया जाएगा।
स्टे की सूचना मिलने के बाद एजेंसी ने काम बंद कर दिया है। भले काम बंद हो गया हो, लेकिन यहां पर आवागमन करना लोगों के लिए मुसीबतों से भरा हो गया है। यहां पर बीच रास्ते में निर्माण एजेंसी ने गुजरात से बुलवाई पाइलिंग ड्रिलिंग मशीन खड़ी कर रखी है। जिससे रास्ता पूरा नहीं खुला है। हैरानी की बात यह है कि यह मशीन वहां से हटाई भी नहीं जा सकती। क्योंकि एक बार शिफ्ट करने के बाद दोबारा ड्रिलिंग होने के बाद हटाया जाता है। ऐसे में यह मशीन मौके से नहीं हट सकती है।
एजेंसी के सुपरवाइजर नीरज कुमार का कहना है कि मशीन गुजरात से बुलाई गई है। इससे ओवर ब्रिज कंपलीट करने के लिए 250 बोर किए जाने हैं। इसके बाद पिलर का काम चालू होगा। यह 60 मीटर ऊंची है और 6 मीटर चौड़ी। इसे 15 लाख रुपए महीने के किराए पर लाया गया है। लाने, ले जाने का भाड़ा भी अलग से लगा है। रोक लगने के बाद काम बंद कर दिया गया है।
कालोनाइजर का आरोप
बता दें ओवर ब्रिज निर्माण पर एक कॉलोनाइजर ने आपत्ति लगाई है। पहले यह ब्रिज 12 मीटर चौड़ा बन रहा था, लेकिन अब साढ़े सात मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है। साथ में फुटपाथ भी दोनों ओर नहीं बनाए जा रहे हैं। ऐसे में डिजाइन और ड्राइंग में परिर्वतन किया गया है। इसमें व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाया गया है। बता दें कि ब्रिज की लंबाई 1100 मीटर एवं चौड़ाई साढ़े सात मीटर है। यह थ्री लेयर ब्रिज है। मलैया मिल फाटक, जबलपुर नाका और रेलवे स्टेशन की ओर बनेगा। इसमें लोग आवागमन कर सकेंगे।
इस संबंध में सेतु निर्माण विभाग के एसडीओ महेंद्र यादव का कहना है कि अभी रोक लगी हुई है। इसलिए मशीन मौके पर खड़ी है। कोर्ट के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, लेकिन मशीन को हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि अब 30 सितंबर तक मशीन इस तरह ही खड़ी रहेगी। किराया कंपनी को देना होगा।