दमोह शहर में नगर पालिका ने चिह्नित किए गए 42 जर्जर भवनों में से अब तक केवल एक को गिराया गया है। बाकी 41 जर्जर भवन अब भी खड़े हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं।
11 अगस्त को नगर पालिका ने घंटाघर के पास हॉकगंज बरंडा में एक जर्जर भवन को पोकलेन मशीन से तीन घंटे में गिरा दिया था। इसके बाद से नगर पालिका की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि कई अन्य भवन भी गिरने की कगार पर हैं। सागर जिले के शाहपुर में जर्जर दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत के बाद प्रदेश सरकार ने जर्जर भवनों और दीवारों को चिह्नित कर गिराने के आदेश दिए थे। दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देश पर नगर पालिका और जिला प्रशासन की टीम ने बरंडा में एक जर्जर भवन को गिराया। अन्य जर्जर भवनों को चिह्नित कर वहां नोटिस चस्पा किए, ताकि लोग समय रहते उन्हें खाली कर सकें। इसके बावजूद न तो इन भवनों को खाली कराया गया और न ही उन्हें गिराने की कोई कार्रवाई की गई।
यहां स्थित हैं जर्जर भवन
शहर में बाराद्वारी कुआं के पास एक सालों पुराना भवन खड़ा है, जो खाली है, लेकिन इसके आसपास मार्ग पर आवाजाही बनी रहती है और दुकानें संचालित हो रही हैं। टॉकीज तिराहे पर मुख्य मार्ग के किनारे एक पुरानी जर्जर बिल्डिंग खड़ी है, जो कभी भी गिरकर जनहानि का कारण बन सकती है। पुराने कलेक्ट्रेट भवन को पीडब्ल्यूडी ने जर्जर घोषित किया है, जहां महिला बाल विकास विभाग, एडीपीओ कार्यालय, आबकारी विभाग, श्रम विभाग, शहरी परियोजना अधिकारी कार्यालय, और जनपद पंचायत दमोह के शासकीय कार्यालय संचालित हैं। बकौली चौक के पास रीठगंज कोठली सराफा बाजार को तीन साल पहले जर्जर घोषित किया गया था, लेकिन यहां अब भी 56 दुकानें चल रही हैं। इसके अलावा, डॉ. दुआ के सामने, राय चौराहा के पीछे, धगट चौराहा, नया बाजार, और फुटेरा वार्ड में भी कई मकान जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं, लेकिन इन्हें गिराने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
नगर पालिका की प्रतिक्रिया
नगर पालिका की प्रभारी सीएमओ रितु पुरोहित ने कहा कि अन्य कामों की व्यस्तता के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही चिन्हित किए गए जर्जर मकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।