भोपाल के बजरिया स्टेशन की पुलिस चौकी पर स्थानीय नेता के मालिकाना हक जताने का मामला विवाद बन गया है। लगभग 43 साल पुरानी चौकी की बिल्डिंग पर कब्जे को लेकर तनातनी चल रही है। दरअसल यह जमीन वक्फ बोर्ड की है और वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद नेता ने जमीन पर कब्जा कर लिया है।
इससे पहले चौकी के पास ही खाली मैदान के एक हिस्से में पुलिस ने टॉयलेट बना लिए थे। वक्फ बोर्ड की यह जमीन भी पुलिस चौकी के पास थी। तब जमीन पर राशिद खान ने अपना अधिकार जताते हुए वक्फ ट्रिब्यूनल में केस दायर किया था। उनकी आपत्ति थी कि पुलिस ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। ट्रिब्यूनल में पेशी के दौरान थाना प्रभारी उपस्थित नहीं हुए। बाद में ट्रिब्यूनल ने राशिद के पक्ष में फैसला सुना दिया। इसके बाद राशिद ने टॉयलेट हटाकर दीवार खड़ी कर दी। साथ ही चौकी को भी कब्जे में लेने के लिए एक और आवेदन प्रस्तुत कर दिया।
राशिद द्वारा आधी चौकी पर कब्जा कर वहां से झंडे का खंभा तक हटा दिया गया। चौकी पर जब कब्जे की बात सामने आई तो पुलिस के अफसरों की नींद उड़ी। पुलिस ने वक्फ ट्रिब्यूनल में आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि चौकी जनहित के लिए है। ट्रिब्यूनल को अपना फैसला सुनाना है।
फैसले का परीक्षण करेंगे
भोपाल के आईजी जगदीश प्रसाद ने बताया कि करीब 43 साल से यह जमीन पुलिस को आवंटित है। ट्रिब्यूनल द्वारा राशिद खान के पक्ष में दिए गए फैसले का परीक्षण किया जाएगा। पुलिस द्वारा इस संबंध में अपील की जाएगी। भोपाल स्टेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर एक के सामने सिकंदरी सराय में पुलिस की लगभग 43 साल पुरानी पुलिस चौकी है। औकाफे शाही ने यह स्थान आवंटित किया था। यह चौकी 1975-76 में मंगलवारा थाने की चौकी हुआ करती थी।
बाद में 1978-79 में इसे थाना स्टेशन बजरिया घोषित किया गया था। भारत टॉकीज पुल के नीचे सरकार द्वारा थाना स्टेशन बजरिया के लिए जमीन आवंटित की गई थी। जिसका मई 1983 में तत्कालीन डीजीपी ने उद्घाटन किया था। इसके बाद इस चौकी पर लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था।
करीब 32 साल बाद 2016 में स्टेशन बजरिया थाना प्रभारी ने अवैध कब्जे हटाकर कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। दो साल से यहां स्टेशन बजरिया की पुलिस की चौकी चल रही थी। यहां बाहर से आने वाले पुलिसकर्मियों के रुकने की भी व्यवस्था थी। इज्तिमा के दौरान भी यहां पूरे समय पुलिस के आला अफसर उपस्थित रहते थे।