छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल के गायनिक वार्ड में लापरवाही का आलम सामने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात भी छिंदवाड़ा अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से एक प्रसूता की मौत हो गई। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि डिलीवरी के दौरान लापरवाह महिला डॉक्टर ने प्रसूता की गलत नस काट दी, जिसके बाद उसे रक्तस्राव होने लगा और हालात बिगड़ने लगी लगभग 5 घंटे तक वह परिजनों को इलाज की बात करते रही, बाद में जब हालात बिगड़ गई तो उसे नागपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।
इस संबंध में चौखड़ा निवासी आकाश टेखरे ने बताया कि उनकी पत्नी बिन्दु टेकरे को जिला अस्पताल के गायनिकी वार्ड प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। 12 बजे गर्भवती को करीब 12 ओटी में ले जाया गया। ऑपरेशन के दौरान महिला का प्रसव कराया गया। जहां स्वस्थ शिशु ने जन्म लिया। यहां प्रसव के दौरान डाक्टरों की लापरवाही से गर्भवती महिला की कोई गलत नस कट गई। इस कारण महिला को रक्त स्राव होने लगा। उन्हें लगभग 4 घंटे बाद इसकी जानकारी लगी तब उन्होंने दोबारा ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने दोबारा उनकी पत्नी को लेबर रूम में लेकर गए और लगभग चार घंटे रात 11:00 तक इलाज की बात करती रही, बाद में जब परिजनों ने यहां शोर मचाना शुरू किया तब उनकी पत्नी को उन्होंने बाहर लाकर कहा कि आप इसे नागपुर ले जाइए हालत काफी बिगड़ चुकी थी। नागपुर ले जाते समय बीच रास्ते में ही बिंदु की मौत हो गई।
10 घंटे बाद किया रेफर
प्रसव के बाद पलंग पर लेटी महिला का रक्तस्राव नहीं रूक रहा था। चार बजे करीब परिजनों ने इस बात की जानकारी डाक्टरों ने दी। डाक्टरों ने कहा थोड़ी देर में आ रहे है। इस तरह परिजनों ने चार से छह बार डाक्टरों को बताया। तकरीबन छह बजे महिला को ओटी में ले गए। जहां रात 10 बजे करीब डाक्टरों ने महिला को नागपुर ले जाने की सलाह दी। तरकीबन छह घंटे बीत चुके थे। इस दौरान लगातार रक्तस्राव होने से महिला गंभीर हो गई। आखिरकार नागपुर ले जाते समय महिला ने दम तोड़ दिया। इस मामले में कहीं न कहीं डाक्टरों की लापरवाही सामने आ रही है। यदि वक्त पर महिला को नागपुर रेफर कर दिया होता तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
नहीं आई सीनियर डॉक्टर
गायनिकी वार्ड में इस दिनों डॉक्टरों की लापरवाही सिर चढ़कर बोल रही है। जूनियर डाक्टरों के भरोसे मरीजों का इलाज हो रहा है। रक्तस्राव बंद नहीं होने की जानकारी पाठक को दी गई। इसके बाद भी वह मरीज को देखने नहीं पहुंची। आखिरकार जूनियर डाक्टरों के केस बिगड़ने से महिला की मौत हो गई।