भीख मांगते निगम अध्यक्ष सोनू मागो
नगर निगम अध्यक्ष सोनू मागो ने शहर की सड़कों पर उतरकर दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ भीख मांगकर कुछ पैसे एकत्रित किए, जिन्हें उन्हें नगर निगम को सौंपा। इन पैसों का उपयोग शवों के अंतिम संस्कार के लिए किया जाएगा। उन्होंने शहरवासियों से अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां खरीदने में मदद करने की अपील की है।
बता दें कि नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही चरम पर है। पिछले तीन दिनों से मोक्ष धाम में लकड़ियां खत्म हो चुकी हैं, जिससे शव का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम लकड़ी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जबकि लकड़ी के लिए मोक्ष धाम में रुपये जमा कराए जाते हैं। गरीबों को मुफ्त में दी जाने वाली लकड़ी भी नहीं मिल रही है, जिसके कारण परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए बाहर से लकड़ी खरीदकर लानी पड़ रही है।
इस स्थिति को देखते हुए नगर निगम के अध्यक्ष सोनू मागो गुरुवार को दाह संस्कार के लिए सड़कों पर भीख मांगने निकले। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मोक्ष धाम में लकड़ी उपलब्ध कराने में सहायता करें। आम लोगों और दुकानदारों ने सोनू मागो के गुल्लक में पैसे डालकर मदद की।
दरअसल, मोक्ष धाम में लकड़ी और कंडे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम इस सुविधा के एवज में लकड़ी से दाह संस्कार करने के लिए 3 हजार रुपए और कंडे से दाह संस्कार करने के लिए 5 हजार रुपए शुल्क मृतक के परिजनों से लेता है। इतना शुल्क लेने के बाद भी स्थिति यह है कि पिछले तीन दिन से मोक्ष धाम में लकड़ी उपलब्ध नहीं है। लोगों को लकड़ी से दाह संस्कार करने के लिए बाहर से लकड़ियां मंगानी पड़ रही हैं। लकड़ी गीली होने के कारण दाह संस्कार करना मुश्किल हो गया है। मोक्ष धाम कर्मी जले हुए डीजल की मदद से शव को जैसे-तैसे जला रहे हैं। ऐसे में कई बार शव अधजला रह जाता है।
पातालेश्वर मोक्षधाम में अंतिम संस्कार की ऐसी व्यवस्था
- नगरपालिका निगम बीपीएल कार्डधारी या स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर लकड़ी निःशुल्क उपलब्ध कराता है।
- जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उन्हें लकड़ी के लिए चार से पांच हजार रुपए और 300 रुपए अतिरिक्त खर्च देना होता है।
- लकड़ी की जगह कंडे लेने पर यह खर्च बढ़कर छह हजार रुपए के आसपास पहुंच जाता है।
- ऐसे लोग जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उन्हें मार्केट से लकड़ियां खरीदकर लानी पड़ती हैं, जिसके लिए चार से पांच हजार रुपए का खर्च आता है।