प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पसमांदा मुसलमानों की बदहाली, यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और हाल ही में पटना में हुई विपक्षी पार्टियों की मीटिंग पर जोरदार हमले बोले। उन्होंने कहा कि वोटबैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमानों को तबाह कर दिया है। उन्हें नीचा और अछूत समझा जाता है। आज भी उन्हें बराबरी का हक नहीं मिलता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर मुसलमानों को भ्रमित किया जा रहा है। हमें उनका भ्रम दूर करना होगा। यह समझाना होगा कि एक परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून और दूसरे के लिए दूसरा। यह नहीं हो सकता। परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक-सा कानून होना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट भी कई बार यूसीसी लागू करने को बोल चुका है।
मोदी ने किस सवाल पर क्या दिया जवाब-
मध्य प्रदेश के दमोह से राम पटेल ने पूछा- आप राजनीति के अतिरिक्त सामाजिक कार्य को कैसे देखते हैं?
मोदीः बूथ की इकाई छोटी नहीं है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को सफल नीति बनाना है तो बूथ कार्यकर्ता की दी जानकारी की ताकत बड़ी होती है। हम भाजपा के कार्यकर्ता एसी में बैठकर पार्टी नहीं चलाते, फतवे नहीं निकालते। हम गर्मी, बारिश, कड़कड़ाती ठंड, यानी हर मौसम में जनता के बीच जाकर खुद को खपाने वाले लोग हैं। बूथ कमेटी न होती तो कभी उज्ज्वला योजना का विचार न आता। भाजपा की बूथ कमेटी की पहचान सेवा से होनी चाहिए। बूथ में रोज तू-तू मैं-मैं और आंदोलन नहीं चाहिए। सेवाधारी की पहचान होनी चाहिए। आपकी पहचान भाजपा कार्यकर्ता से आगे बढ़कर एक समाज सेवक की बने, इसके लिए बूथ पर लगातार काम करना होगा।
आंध्र प्रदेश के सल्ला रामकृष्णन ने पूछा- कार्यकर्ताओं को और अधिक कार्य कैसे करना चाहिए?
मोदीः 2047 में जब हमारे देश की आजादी को 100 साल होंगे, तब हम देश को विकसित भारत बनाना चाहते हैं। भारत विकसित तभी होगा, जब गांव विकसित होगा। हर गांव को समस्याओं से मुक्त करना है। इसके लिए छोटे-छोटे प्रयास बहुत बड़े असर दिखा सकते हैं। हमारा गांव हरा-भरा कैसे हो? कैसे गांव में स्वच्छता को अलग-अलग कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं? गांव में सोलर एनर्जी को कैसे बढ़ाएं? सौर ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो, इस पर काम करना है। हम लोगों को प्रेरित करें। आपके इलाके में कोई ड्रॉपआउट नहीं रहना चाहिए। बूथ कार्यकर्ता के तौर पर आप वहां के जनजीवन से जुड़िए। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़िए। उसमें राजनीति नहीं होती है। उसमें आगे बढ़ने का इरादा होता है।
बिहार के मोतिहारी से रिपु सिंह ने पूछा- सरकारी योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैसे पहुंचाएं?
मोदीः हमारा लक्ष्य सिर्फ एक योजना का लाभ देना भर नहीं है। हमारा लक्ष्य शत-प्रतिशत कवरेज का है। गांव में पीएम आवास योजना से घर मिला क्या? घर मिला है तो यह देखना कि उन्हें मुद्रा योजना का लाभ मिल सकता है क्या? कोई दुकान खोलना चाहते हैं क्या? घर मिल गया है तो उसका भाजपा पर विश्वास बन गया है। सारे काम देखने का काम भाजपा के बूथ कार्यकर्ता का है। हमें गरीब को मुसीबत से मुक्त करना है। सरकारी योजना की जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया पर गांव के बूथ का ग्रुप बना सकते हैं। नमो एप से जोड़ सकते हैं। यह देखना चाहिए कि बूथ के लोग आपके एमपी, एमएलए से जुड़े हैं या नहीं? जब हम पुरानी परिस्थितियों से तुलना कर बात करते हैं तो इसका अलग प्रभाव पड़ता है।
उत्तराखंड के चमौली से डॉ. हिमानी वैष्णव ने पूछा- तुष्टिकरण और संतुष्टिकरण के अंतर को हम जनता तक कैसे पहुंचाएं?
मोदीः कुछ लोगों को भ्रष्टाचार, कमीशन, मलाई खाने का, कट मनी का, हिस्सा मिलता है। उन्होंने जो रास्ता चुना है, उसमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। यह रास्ता तुष्टिकरण और वोटबैंक का है। गरीब को गरीब बनाए रखने से ही उनकी राजनीति चलती है। यह रास्ता कुछ दिन फायदा दे सकता है, लेकिन देश के लिए महाविनाशक होता है। देश में तबाही लाता है। एक तरफ इस तरह के लोग हैं, जो तुष्टिकरण कर स्वार्थ के लिए छोटे-छोटे कुनबे दूसरों के खिलाफ खड़े कर देते हैं। यूपी, बिहार, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक को जातियों में बांट रखा है। कई जातियां हैं, क्या हाल करके रखा हैं उनका? मेरे पास लंबी लिस्ट है। तुष्टिकरण की राजनीति ने उन्हें बर्बाद करके छोड़ा है। हमारा रास्ता 100 प्रतिशत संतुष्टिकरण का है। हमारी योजनाओं का लाभ गरीबों को मिला है। भाजपा सरकार ने बंजारा और घूमंतु समुदाय को कल्याण बोर्ड दिया। ओबीसी बोर्ड को संवैधानिक दर्जा देने का काम भी हमने ही किया। हमारी सरकार ने ही गरीब परिवारों को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिया। तुष्टिकरण और संतुष्टिकरण में इतना बड़ा फर्क होता है।
उत्तरप्रदेश की रानी चौरसिया ने पूछा- यूनीफॉर्म सिविल कोड का विरोध हो रहा है। हम मुस्लिम भाई-बहनों का भ्रम कैसे दूर करें?
मोदी: जो भी तीन तलाक के पक्ष में बात करते हैं, वह वोट बैंक के भूखे लोग मुस्लिम बेटियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय कर रहे हैं। तीन तलाक से सिर्फ बेटियों के साथ अन्याय नहीं होता, बल्कि परिवार तबाह हो जाते हैं। मिस्र, पाकिस्तान, कतर, इंडोनेशिया, जॉर्डन, सीरिया और बांग्लादेश जैसे इस्लामिक देश तीन तलाक खत्म कर चुके हैं। इस्लाम से संबंध होता तो मुस्लिम देश तीन तलाक खत्म नहीं करते। मेरी मुस्लिम बहनें, बेटियां भाजपा के साथ खड़ी रहती हैं। मोदी के साथ खड़ी रहती हैं।
भारत के मुसलमान भाई-बहनों को समझना होगा कि कौन-से राजनीतिक दल उन्हें भड़काकर उनका फायदा लेने के लिए उन्हें बर्बाद कर रहे हैं। यूनीफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के नाम पर ऐसे लोगों को भड़काने का काम हो रहा है। आप मुझे बताइए एक घर में परिवार के एक सदस्य को एक कानून, दूसरे के लिए दूसरा कानून। क्या वह घर चल पाएगा क्या? ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल सकेगा? यह लोग हम पर आरोप लगाते हैं। सच यह है कि यही लोग मुसलमान-मुसलमान करते हैं। मुसलमानों के सही मायने में हितैषी होते, तो अधिकांश मुस्लिम परिवार शिक्षा और रोजगार में पीछे नहीं रहते। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि कॉमन सिविल कोड लाओ। डंडा मारती है।
वोटबैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमान भाई-बहनों का तो जीना भी मुश्किल कर रखा है। उन्हें तबाह कर दिया है। उनकी आवाज सुनने को कोई तैयार नहीं है। पसमांदा मुसलमानों का इतना शोषण किया है, लेकिन इस पर कभी चर्चा नहीं हुई। आज भी उन्हें बराबरी का हक नहीं मिलता। उन्हें नीचा और अछूत समझा जाता है। यह सब इतने पिछड़े रहे हैं। कई पीढ़ियों को भेदभाव भुगतना पड़ा। भाजपा देश के हर नागरिक के लिए सबका साथ सबका विकास भावना के साथ काम कर रही है। भाजपा कार्यकर्ता जब इन तर्कों-तथ्यों के साथ मुसलमान भाई-बहनों के पास जाएंगे और उन्हें बेहतर तरीके से समझाएंगे तो उनका भ्रम दूर होगा।
गुजरात की हेतलबेन जानी ने पूछा- विपक्षी दल एकजुट होकर लड़ने की कोशिश कर रहे हैं? आप इसे कैसे देखते हैं?
मोदीः 2024 में भाजपा की प्रचंड विजयी तय है। इस वजह से सभी विपक्षी बौखलाए हुए हैं। नया शब्द पापुलर हो रहा है गारंटी। कुछ दिन पहले इन लोगों का एक फोटो ऑप कार्यक्रम हुआ था। बैठक में शामिल दलों के इतिहास को देखेंगे तो पता चलेगा कि वह सब मिलकर कम से कम 20 लाख करोड़ रुपये के घोटालों की गारंटी है। कांग्रेस का घोटाला अकेले ही लाखों करोड़ों का है। 1.86 लाख करोड़ का कोयला घोटाला, 1.76 लाख करोड़ का 2जी घोटाला, 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला, 10 हजार करोड़ का मनरेगा घोटाला। फिर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर हजारों करोड़ के घोटाले के आरोप हैं। चारा घोटाला, पशु पालन शेड घोटाला, बाढ़ राहत घोटाला... आरजेडी के घोटालों की इतनी लंबी सूची है कि अदालतें भी थक गई। एक के बाद एक सजा दे रही है। तमिलनाडु में डीएमके पर अवैध तरीके से सवा लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनने का आरोप है। टीएमसी पर 23 हजार करोड़ के घोटाले के आरोप हैं। रोजवैली, सारदा, शिक्षक भर्ती, गोतस्करी घोटाला और कोयला तस्करी घोटाला। बंगाल के लोग यह घोटाला कभी भूल नहीं सकते। एनसीपी की बात करूं तो करीब-करीब 70 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव घोटाला, सिंचाई घोटाला, अवैध खनन घोटाला... इनकी लिस्ट भी बहुत लंबी है। इन पार्टियों के घोटालों का मीटर कभी डाउन नहीं होता। बीजेपी के किसी इनोवेटिव कार्यकर्ता को इन पार्टियों का घोटाला मीटर बनाना चाहिए। इन लोगों को घोटालों का अनुभव है। सिर्फ घोटालों की गारंटी है। क्या घोटालों की गारंटी को देश स्वीकार करेगा?
अगर उनकी घोटालों की गारंटी है तो मोदी की भी एक गारंटी है। हर घोटालेबाज पर कार्रवाई की गारंटी है। हर चोर-लुटेरे पर कार्रवाई की गारंटी है। जिसने गरीब को लूटा है, जिसने देश को लूटा है, उसका हिसाब होकर रहेगा। कानून का डंडा चल रहा है, जेल की सलाखें दिख रही हैं। तब जाकर यह जुगलबंदी हो रही है। इनका कॉमन मिनिमम प्रोग्राम भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक्शन से बचने का है।
गांव में कोई भी अपराधी जब सजा काटकर आता है तो लोग उसके पास जाते हैं और पूछते हैं कि जेल कैसी होती है! उनको खुद डर होता है! पटना से अच्छी जगह क्या हो सकती है। मैं देख रहा हूं कि कई लोग, जो जमानत पर हैं, जो घोटालों के आरोपी हैं, जो भ्रष्टाचारी हैं, ऐसे लोग उन लोगों से जाकर मिल रहे हैं, जो सजा काट रहे हैं या जेल से आ रहे हैं। यह देश के लोगों को समझना है। देश के लोग हमसे ज्यादा अच्छे से ये बात समझते हैं।
कोई गरीब ये नहीं चाहता कि उनके बच्चों के नसीब में गरीबी रहे। परिवार के नाम पर वोट मांगने वालों ने अपने परिवार का भला किया। आपको गांधी परिवार के बेटे-बेटी का विकास करना हो तो कांग्रेस को वोट दीजिए। आपको मुलायम सिंह के बेटे का भला करना है, तो सपा को वोट दीजिए। आपको लालू परिवार का भला करना है तो आरजेडी को वोट दीजिए। आपको शरद पवार की बेटी का भला करना हो, तो एनसीपी को वोट दीजिए। आपको अब्दुल्ला परिवार के बेटे का भला करना हो तो नेशनल कांफ्रेंस को वोट दीजिए। अगर आपको अपने बेटे-बेटी का, पोते-पोती का, नाती-नातिन का भला करना है, तो भाजपा को वोट दीजिए।
राजस्थान के अजमेर से रचित कुशवाह ने पूछा- हमारी सरकारों की वजह से लोगों को बचत हुई है, यह लोगों को कैसे समझाएं
मोदीः भारत उन देशों में है, जहां विकास तेजी से हो रहा है। महंगाई दर बेकाबू नहीं होने दी है। उन देशों में गरीब, मध्यम वर्ग के लोग महंगाई की वजह से हाहाकार मचा है। पड़ोस में देखें तो पाकिस्तान में महंगाई दर कितनी है? 38 प्रतिशत से अधिक महंगाई दर है। श्रीलंका में 25 प्रतिशत से ज्यादा है। बांग्लादेश में 10 प्रतिशत के आसपास है। भारत में महंगाई की दर पांच प्रतिशत से भी कम है। कोरोना के बावजूद इतने समय से चले आ रहे युद्ध के बावजूद भारत में हमने महंगाई को बेकाबू नहीं होने दिया है।
भाजपा सरकार का जोर तो बचत कराने पर है। आज हर भारतीय हर महीने एवरेज 20 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है। 2014 से पहले हमारे देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब एक जीबी डेटा की कीमत थी 300 रुपये। उस हिसाब से आज आपका मोबाइल बिल कम से कम छह हजार रुपये महीना आता। भाजपा सरकार ने डेटा को गरीब के लिए बिल्कुल सस्ता कर दिया है। आपको 20 जीबी डेटा के लिए 200-300 रुपये देना पड़ता है। करीब-करीब पांच हजार रुपये हर महीने बच रहा है। जन औषधि दुकानों की वजह से सस्ती दवा मिल रही है। भाजपा सरकारों में पेट्रोल के दाम 100 रुपये से कम है। भाजपा हर पल उनकी मदद के लिए खड़ी रहती है। विपक्षी पार्टियां कैसे गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों की जेब काट रही है।
छत्तीसगढ़ के संजय सोढ़ी ने पूछा- किसानों के हित में भाजपा और कांग्रेस के अप्रौच के अंतर को कैसे लोगों को समझाएं?
मोदीः कांग्रेस सरकारों में सूखा पड़ता था तो किसान परेशान होते थे। बाढ़ आती थी तो किसान की सुध लेने वाला कोई नहीं होती थी। मदद बिचौलिये खा जाते थे। कांग्रेस की नीति थी- किसानों को संकट में आने दो। फिर कर्जमाफी के नाम पर उन्हें धोखा दो। कर्जमाफी का लाभ कभी किसानों को मिला ही नहीं। दस दिन में, 100 दिन में करेंगे, ऐसा बोलते हैं। लेकिन करते नहीं है। छोटे किसानों का तो बैंक में खाता तक नहीं होता। छोटे किसानों को कभी कर्जमाफी मिली ही नहीं। पीएम किसान सम्मान निधि से सीधा पैसा किसानों के खाते में जा रहे हैं। छोटे से छोटा किसान भी लाभान्वित हो रहा है। सवा दो लाख करोड़ रुपये अब तक बांट चुके हैं। महंगी यूरिया का बोझ भी किसानों तक नहीं पड़ने दिया। दो लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया।