मध्य प्रदेश विधानसभा ने मध्य प्रदेश फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस विधेयक पारित कर दिया है। नए कानून के तहत फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे आगजनी की घटनाओं की रोकथाम और आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी हो सकेंगे। विधेयक के अनुसार प्रदेश में एकीकृत मध्य प्रदेश फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस का गठन किया जाएगा। इसके संचालन के लिए अलग से फायर सेफ्टी निदेशालय बनाया जाएगा। राज्य सरकार जरूरत के अनुसार या स्थानीय निकायों की सिफारिश पर आधुनिक फायर स्टेशन और फील्ड यूनिट स्थापित कर सकेगी। विधेयक में यह भी व्यवस्था की गई है कि आपात स्थिति में फायर सेफ्टी दल को किसी भी सरकारी या निजी जल स्रोत से बिना शुल्क पानी लेने का अधिकार होगा, ताकि राहत और बचाव कार्य में देरी न हो।
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अब किसी भी भवन के निर्माण से पहले फायर प्लान की मंजूरी और फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य होगा। बिना फायर एनओसी के किसी भवन को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (भवन उपयोग की अनुमति) नहीं मिलेगी। सरकार निजी विशेषज्ञ एजेंसियों को भी लाइसेंस देगी। ये एजेंसियां फायर प्लान तैयार करेंगी, सुरक्षा ऑडिट करेंगी और थर्ड पार्टी प्रमाणन का काम करेंगी। साथ ही, एक ही परिसर या क्षेत्र में स्थित कई व्यावसायिक भवनों के लिए साझा फायर सेफ्टी व्यवस्था की भी अनुमति होगी, जिससे निर्माण लागत कम होगी।
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इन नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
आग लगने की घटना को लेकर अफवाह फैलाने पर 20 हजार रुपये जुर्माना।
फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना।
नियमों का उल्लंघन जारी रखने पर 5 हजार रुपये प्रतिदिन का जुर्माना।
बिना फायर एनओसी और स्वीकृत फायर प्लान के भवन संचालित करने पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
प्रशासन द्वारा सील किए गए भवन की सील तोड़ने पर 5 लाख रुपये जुर्माना।
ड्यूटी में लापरवाही वाले फायर सेफ्टी कर्मियों पर तीन माह तक की जेल या तीन माह के वेतन की कटौती का प्रावधान।