अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर भाजपा देश में उत्सव मनाने की तैयारी की जा रही है। इस बीच कांग्रेस के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के न्यौता अस्वीकार करने पर पार्टी की ही मुश्किलें बढ़ गई है। धार के बाद अब ग्वालियर शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष व तीन बार पार्षद रहे आनंद शर्मा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपना अपमान बर्दाश्त कर सकते है, लेकिन प्रभु श्रीराम का नहीं। जो कांग्रेस राम की नहीं, वह अब वह किसी काम की नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपने पड़ोसी से आंख में आंख मिला कर बात तक नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उनका एक ही सवाल है कि कांग्रेस ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से दूर क्यों बनाई। इस सवाल का जवाब हम कार्यकर्ता के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व को निर्णय लेने से पहले एक बार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिंह राव की नीति का अवलोकन जरूर कर लेना चाहिए था। शर्मा अब भाजपा की सदस्यता लेने की तैयारी में है।
बता दें इससे पहले धार में युवक कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने भी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने जिला अध्यक्ष को पत्र लिखा और खुद को शीर्ष नेतृत्व के निर्णय को मन को आघात पहुंचाने वाला और पीड़ादायक बताया था। उन्होंने लिखा कि संघर्ष की इस लड़ाई में अनेक प्रकरण मेरे ऊपर पंजीबद्ध हुए हैं, जो अभी न्यायालय में लंबित हैं परंतु निज धर्म को सर्वमान्य मानते हुए अपने आप को कांग्रेस के सभी पदों से मुक्त कर प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूं।'
कांग्रेस के रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पार्टी के कई नेता नाराज हैं। दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह ने भी शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को भाजपा के राजनीतिक लाभ के लिए आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि धर्म निजी मामला है, लेकिन भाजपा आरएसएस ने मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम को इवेंट बना लिया है। वहीं, शीर्ष नेतृत्व के निर्णय के समर्थन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मंदिर के पूरी तरह बन कर तैयार होने पर प्रदेश से एक लाख कार्यकर्ता प्रभुश्री राम के दर्शन करने अयोध्या जाएंगे।