राजधानी भोपाल का बीआरटीएस कॉरिडोर 15 साल बाद हटेगा। इसे हटाने का काम 20 जनवरी से शुरू होगा। अगले तीन महीने में इसे पूरा हटा दिया जाएगा। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने की कार्ययोजना पर अधिकारियों से चर्चा की।
उन्होंने अधिकारियों को कहा कि बीआरटीएस को हटाने का काम तय समयसीमा हो। कॉरिडोर को यातायात में सुगमता और जनसुविधा के लिए हटाया जा रहा है। अत: जहां ट्रैफिक का दबाव सर्वाधिक हो, वहीं से बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का काम शुरू किया जाए। बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का काम बैरागढ़ से शुरू होगा। सीएम ने कहा कि जन सुविधा को देखते हुए बीआरटीएस हटाने का काम रात में किया जाए ओर पुलिस से समन्वय करते हुए बीआरटीएस हटाने की संपूर्ण अवधि में शहर में सुगम और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
हटाने में लगेंगे 27 करोड़
उल्लेखनीय है कि बीआरटीएस कॉरिडोर के मिसरोद से एम्प्री तक 6.4 किलोमीटर, रोशनपुरा से कमला पार्क तक 1.42 किलोमीटर, कलेक्ट्रेट कार्यालय से लालघाटी तक 1.73 किमी और हलालपुर से सीहोर नाका तक 3.81 किलोमीटर तक चार भाग हैं। हलालपुर से सीहोर नाका तक बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने की कार्रवाई लोक निर्माण विभाग द्वारा की जाएगी। शेष तीन भागों में नगर निगम भोपाल कॉरिडोर हटाएगा। कॉरिडोर हटने के बाद आवागमन के लिए छह लेन की सुविधा उपलब्ध होगी। हटाने के काम में करीब 27 करोड रुपये खर्च आएगा।
360 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया
बता दें तत्कालीन शिवराज सरकार ने भोपाल बीआरटीएस को 2011 में संशोधित डीपीआर के बाद मंजूरी दी थी। इसका काम दो साल बाद सितंबर 2013 में पूरा हुआ था। इसमें संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ से लेकर मिसरोद तक का 24 किमी का निर्माण किया गया। इस पर करीब 360 करोड़ रुपये खर्च किया गया।
क्या होता है बीआरटीएस
बीआरटीएस यानी बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी बसों के परिवहन के लिए कॉरिडोर होता है। इसे चौड़ी सड़कों पर सार्वजनिक बसों के परिवहन के लिए बनाया जाता है। इसमें बसों के अलावा किसी दूसरे वाहन के आवागमन की अनुमति नहीं होती है।
इसलिए हुआ फेल
बीआरटीएस के निर्माण के बाद दूसरे वाहनों के सड़क की चौड़ाई कम हो गई। जिससे जाम जैसी स्थिति निर्मित होने लगी। वहीं, कई बार कॉरिडोर के अंदर से दूसरे वाहन का भी संचालन होते देखा गया। वहीं, कई जगह बीआरटीएस का ओपन हिस्सा होने से जाम की स्थिति पहले जैसी ही देखी गई। इससे बीआरटीएस की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े होने लगे।