मध्य प्रदेश में लगातार तेज बारिश से कई नदियां उफान पर हैं। कई इलाकों में अब भी बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। बीते 24 घंटे में बारिश कम होने से राहत महसूस की गई। नर्मदा कई हिस्सों में खतरे के निशान से नीचे हो गई है। हालांकि कई नदियां अब भी डेंजर लेवल से ऊपर बह रही हैं। अगले 24 घंटों में भी भारी बारिश का कोई अनुमान नहीं है।
मौसम केंद्र की रिपोर्ट बता रही है कि पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, चंबल संभाग के जिलों में अधिकांश स्थानों पर, नर्मदापुरम संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर, जबलपुर, शहडोल, सागर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर तथा रीवा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई। आलोटमें 16, ताल में 14, जौरा में 10, पिपलौदा, बाजना, बड़ौद में 9, जीरापुर में 8, भानपुरा, शामगढ़, कुंभराज, सुवासरा में 6, नलखेड़ा, सैनाना, खिलचीपुर, आगर, जावद, धुंधकड़ा, सुसनेर, बागली, कयामपुर, गुलाना में 5 सेंटीमीटर तक पानी गिरा है।
अगले 24 घंटों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान कहता है कि शहडौल, रीवा, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, भोपाल, चंबल एवं ग्वालियर संभागों के जिलों में कुछ स्थानों पर, जबलपुर, सागर संभागों के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने यलो अलर्ट भी जारी किया है। इसके मुताबिक अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, उज्जैन, नीमच एवं मंदसौर जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का अंदेशा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों की बात करें तो पश्चिमी मप्र के कई जिलों में दिन का पारा लुढ़का है तो पूर्वी हिस्से में अधिकतम तापमान में उछाल दर्ज किया गया। गुना में जहां 4.8 डिग्री की गिरावट रही, वहीं उमरिया में 4.7 डिग्री का उछाल देखा गया। प्रदेश में सबसे गर्म रीवा रहा, यहां 33.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में रतलाम जिले में 34 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो फिलहाल प्रदेश के मौसम पर प्रभाव डालने वाला सिस्टम एक्टिव नहीं है, जिससे दो दिन तेज बारिश की संभावना कम ही है। दो दिन बाद बंगाल की खाड़ी में एक अन्य कम दवाब का क्षेत्र बनने जा रहा है, जिसके प्रभाव से प्रदेश के कुछ इलाकों में फिर जोरदार बारिश हो सकती है। जानकारों की मानें तो अरब सागर में हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात एक्टिव है। मानसून ट्रफ अवदाब के क्षेत्र से सतना, अंबिकापुर, झारसुगड़ा से होकर बंगाल की खाड़ी तक बना हुआ है।