को खां, अपने एमपी समेत पूरे मुल्क में सियासत में परिवारवाद के खिलाफ माहोल चल रिया हे। बीजेपी ने महाराष्ट्र में शिवसेना के सदर उद्धव ठाकरे को तखत से बेदखल कर उसी पार्टी के आम कारकून ओर गुजरे जमाने आटो डिराइवर रिए एकनाथ शिंदे को चीफ मनीस्टर बनवा दिया तो इधर मधपिरदेश में परिवारवाद के नाम पे दो आला नेताओं में ठन गई। मामला संवेधानिक मसला बन गिया।
बीजेपी ने पिरधानमंत्री नरेंदर मोदी के बयान के बाद पूरे मुल्क में परिवारवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई हे। इसके लपेटे में भी मियां, वो तमाम नेता आ रिए हें, जो अर्से से अपने घरवालों को सियासत की सीढ़ी चढ़वाने की मशक्कत कर रिए थे। इस दफे मुनिसिपल कारपोरेशन के इलेक्शन में ज्यादातर नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट नई मिले। अलबत्ता ‘हम डाल डाल तो तुम पात पात’ की तर्ज पे पंचायत चुनावों में ऐसे नेताओं के खूब घाला करा। ये चुनाव पार्टी के निशान पे नई हो रिए मगर खां, नेताओं के अपने नाते रिश्तेदारों को खूब टिकट दिलवाए। इनमें सूबे की विधानसभा के अध्यक्ष जनाब गिरीश गोतम भी शुमार हें। जिला पंचायत में बेटे को टिकट दिलवा के खुद चुनाव पिरचार में करने गए। मगर हाय री किस्मत, बाप तीरंदाज होते हुए भी बेटा इलेक्शन में हार गया। हवा फेली के विधानसभा अध्यक्ष की पंचायत चुनाव में तक नई चली। मामला यही खतम नई हो रिया। विधानसभा में नेता पिरतीपक्ष ओर कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने अध्यक्षजी को इसी बिना पे घेर लिया। उन्होंने अध्यक्ष को चिट्ठी लिख मारी के बतोर अध्यक्ष आपका इस तरा से बेटे का चुनाव पिरचार करना संवेधानिक मरयादा का उल्लंघन हेगा। मतलब के जब आप खुद ई बेटे का चुनाव पिरचार कर रिए हें तो विधानसभा में अपोजिशन के एमएलए आपसे कोन से इंसाफ की उम्मीद करें।
हालांकि, अध्यक्ष जी ने सफाई देने की कोशिश करी के बतोर स्पीकर मेरी जिम्मेदारियां अलग हें ओर घर में अलग। उन्होंने ने तो ये तक के डाला के डॉ. गोविंद सिंह का लेटर उन्हें मिला ई नई हे। इस पूरे मामले में आम पब्लिक हीरो बनके उभरी हे। पंचायत चुनाव के पेले दोर में वोटर ने चुनाव में खड़े नेताओं के उन तमाम नाते-रिश्तेदारों को धूल चटा दी, जो उम्मीद लगाए बेठे थे के गादी उन्हीं की खातिर बनी हे। इस तरह पब्लिक का फटका खाने वालों में कई आला नाम हें। गिरीश गौतम ही नहीं, शिवराज सरकार में मंत्री विजय शाह की बहन रानू शाह, कांग्रेस विधायक ग्यारसीलाल की बीवी देवी रावत और बेटा राकेश रावत भी सेंधवा विधानसभा क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए हैं। बुरहानपुर के निर्दलीय विधायक सुरेन्द्रसिंह शेरा की बेटी लयश्री ठाकुर और बहू अभिलाषा ठाकुर को भी मतदाताओं ने घर भेज दिया है।
मियां, अब पिरदेश में पंचायत चुनाव की वोटिंग का दूसरा दोर चल रिया हे। इस दोर में भी कोन-कोन के नेताओं के नाते रिश्तेदार ओंधे गिरते हें, ये पूरा पिरदेश देख रिया हे। सुकून की बात ये हे के खां, पब्लिक बाप के बेटे और बेटे के बाद पोते को झेलने के कतई मूड में नई हे। कोई अपनी काबिलियत पे सियासत में टिके तो ठीक हे, वरना बाप के नाम वोट मांगने का जमाना अब खतम हो रिया हे।
-बतोलेबाज
( मार्फत अजय बोकिल)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।