भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के अंतर्गत पहले ही दिन एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के लिए एक इवेंट पर बवाल हो गया। भारत भवन में यह कार्यक्रम होना था। वहां के ट्रस्टियों के विरोध के बाद आयोजकों को यह इवेंट ही रद्द करना पड़ा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। इवेंट के पक्ष और विपक्ष में दलीलें दी जा रही हैं। इस इवेंट के बिना ही फेस्टिवल शुरू हो चुका है।
श्यामला हिल्स स्थित भोपाल भवन में भोपाल लिटरेचर फेस्ट के पहले दिन शुक्रवार को एलजीबीटीक्यू समुदाय का एक कार्यक्रम होना था। लेखक ओनिर धर 'आई एम ओनिर एंड आई एम गे' विषय पर अपनी बात रखने वाले थे। खैर, भारत भवन जैसे संस्थान में इस विवादित विषय पर इवेंट रखने को लेकर बवाल खड़ा हो गया। कई लोगों ने विरोध किया। इस मामले में आयोजक राघव चंद्रा से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वे फेस्ट की तैयारियों में व्यस्त थे। इस वजह से उनसे बातचीत नहीं हो सकी।
भारत भवन के ट्रस्टियों ने किया विरोध
भारत भवन के ट्रस्टी भी इस इवेंट के खिलाफ खड़े हो गए थे। ट्रस्ट के सदस्य विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि हमने व्यक्तिगत रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन भारत भवन में करने को लेकर आपत्ति जताई थी। विचारों की स्वतंत्रता अपनी जगह ठीक है, लेकिन यह प्रोग्राम हमारी संस्कृति से भिन्न हैं। हमसे न तो ऑर्गनाइजर ने कार्यक्रम के आयोजन करने और न ही रद्द करने के बारे में पूछा है। ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य और अभिनेता राजीव वर्मा ने भी कहा कि यह इवेंट आयोजकों ने रखा था। हमसे कुछ पूछा नहीं था। हमें इस पर आपत्ति थी।
ओनिर ने ट्विटर पर शेयर की अपनी पीड़ा
इवेंट ओनिर धर का था। उन्होंने इवेंट रद्द होने की पीड़ा ट्विटर पर व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि मैं हैरान और दु:खी हूं कि जिस कार्यक्रम में मैं वास्तव में बोलने को उत्सुक था, उसे मुझे छोड़ना पड़ा। एक ग्रुप ने मेरा और मेरे कार्यक्रम का विरोध किया। हिंसा करने की धमकी दी। पुलिस ने आयोजकों से कहा कि वह मेरी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। इस वजह से उन्होंने मेरा कार्यक्रम रद्द कर दिया।
सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रिया
वीर संघवी और निधि राजदान जैसे पत्रकारों ने भी ओनिर के ट्वीट पर कमेंट करते हुए दुख प्रकट किया है। वहीं, पत्रकार और हिंदी के जाने-माने लेखक विजय मनोहर तिवारी ने ट्वीट कर इवेंट रद्द करने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि समाज में उनका ह्रदय से सम्मान है किंतु साहित्य के नाम पर कम से कम भारत भवन के प्रांगण में न ये विषय प्रासंगिक है, न आवश्यक। बात देर से अक्ल में आने के बाद उत्साही, विचारशील एवं आधुनिकतावादी आयोजकों द्वारा भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल से ये बकवास विषय फौरन हटा लिया गया है।