नर्स की देखरेख में नवजात बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
अशोक नगर में जिला अस्पताल में गुरुवार को बड़ा विस्फोट हुआ। यहां शॉर्ट सर्किट की वजह से एसएनसीयू में जोरदार धमाका हुआ। गनीमत रही कि इस धमाके के बाद भी एक बड़ा हादसा होने से टल गया। नर्स और स्टाफ ने अपनी जान पर खेलकर दस मासूम बच्चों को बचा लिया। सबसे बड़ा सवाल ये है कि हर साल इसी अस्पताल में आखिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों हो रही है।
इस धमाके की वजह शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। पहले बिजली के तार में स्पार्किंग हुई और उसके बाद चिंगारी ने ऑक्सीजन केबल डैमेज कर दिया। जिला अस्पताल में पुराने और काम एमपीयर की केबल लगी हुई है। इस कारण आए दिन यहां शॉर्ट सर्किट की घटनाएं सामने आ रही हैं। गुरुवार को अस्पताल के जिस वार्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ वहां दस नवजात बच्चे भर्ती थे। धमाके की आवाज सुनते ही वार्ड में अफरा-तफरी माहौल बन गया। स्टाफ नर्सों के साथ बाहर खड़े पालक भी नवजात को बचाने के लिए दौड़े और इन सभी नवजातों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराया।
ये भी पढ़ें- अग्नि सुरक्षा के तहत प्रशासन ने मारा छापा, आभूषण कारखाने से 27 सिलिंडर जब्त, बाल श्रमिक मिले
मौके पर मौजूद अरुण ने बताया कि एसी के पास दिखाई दे रहे तार में अचानक स्पार्किंग हुई और तेज धमाका हुआ। आवाज सुनकर सभी चिल्लाने लगे। मैं भी घबराने लगा, क्योंकि इस वार्ड में मेरी बेटी भी भर्ती थी। मौके पर मौजूद अस्पताल की स्टाफ नर्स और लोगों ने सभी नवजात बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराया। उपेंद्र ने बताया अगर थोड़ी देर हो जाती या वहां पर कोई स्टाफ या अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं होते तो यह बड़ा हादसा हो जाता।
पहले भी हुए हादसे
बता दें एक साल पहले इसी अस्पताल में शॉर्ट सर्किट के कारण तीन घटना हो चुकी हैं। जुलाई 2023 में ओपीडी के करीब मुख्य गेट के पास शॉर्ट सर्किट से हादसा हुआ था। इसके बाद जनवरी 2024 को इलेक्ट्रिक रूम में इस तरह का हादसा देखने को मिला था। वहीं डेढ़ साल बाद एसएनसीयू वार्ड में इस तरह की घटना सामने आई।