फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ashoknagar News: अशोकनगर जिला अस्पताल में लापरवाही का आरोप, मासूम का शव बाइक से ले जाने को परिवार मजबूर

Wed, 18 Mar 2026 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगर

सार

अशोकनगर जिला अस्पताल में चार माह की बच्ची की मौत के बाद परिजनों को शव बाइक से ले जाना पड़ा। शव वाहन न मिलने के आरोप लगे। घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए, जबकि प्रशासन ने जांच की बात कही है। 

विज्ञापन
सिस्टम की लापरवाही बच्ची को बाइक से घर ले जाने मजबूर परिजन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अशोकनगर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चार माह की मासूम बच्ची की मौत के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर चिंता बढ़ा दी है। इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली बच्ची के परिजनों को उसका शव मोटरसाइकिल से गांव ले जाना पड़ा, जबकि अस्पताल परिसर में शव वाहन उपलब्ध होने की बात कही जा रही है।

विज्ञापन


जानकारी के अनुसार, बच्ची साक्षी जन्म के बाद से ही अस्वस्थ थी और लगातार इलाज चल रहा था। बुधवार तड़के करीब 4 बजे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद पिता मुकेश कुशवाहा उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के दौरान बच्ची का हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम पाया और तुरंत उपचार शुरू किया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ ही देर में मासूम ने दम तोड़ दिया।

ये भी पढ़ें- Indore Fire Tragedy: एक साथ जलीं सात चिताएं, बिहार के सेठिया परिवार के छह लोगों की अंत्येष्टि भी हुई इंदौर में
विज्ञापन


बच्ची की मौत के बाद जो स्थिति बनी, उसने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद होने के बावजूद उन्हें शव वाहन की सुविधा नहीं दी गई। मजबूरी में बच्ची के दादा उसे गोद में उठाकर अस्पताल गेट तक पैदल आए। इसके बाद परिवार ने एक मोटरसाइकिल का सहारा लिया और उसी के जरिए अपने गांव पठारी के लिए रवाना हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक पर एक व्यक्ति वाहन चला रहा था, उसके पीछे बच्ची की मां बैठी थी और सबसे पीछे एक युवक मासूम का शव गोद में लिए हुए था। यह दृश्य न केवल भावुक करने वाला था, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर शव वाहन की सुविधा मिल जाती, तो उन्हें इस तरह की कठिन और पीड़ादायक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
विज्ञापन


इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. भूपेंद्र शेखावत का कहना है कि घटना उनके संज्ञान में आई है और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार परिजन अपनी सुविधा के अनुसार स्वयं ही शव ले जाते हैं, जबकि अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध रहते हैं।  

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें