अनूपपुर स्थित अमरकंटक के जंगलों में स्थित साल के घने वनों पर साल बोरर कीड़ों का संक्रमण होने की वजह से यहां स्थित लगभग 40 लाख साल के वनों पर इसका खतरा मंडरा रहा है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने अमरकंटक क्षेत्र के 9,535 संक्रमित साल वृक्षों की कटाई की अनुमति भारत सरकार से मांगी है, ताकि संक्रमण को अन्य स्वस्थ पेड़ों तक फैलने से रोका जा सके।
यह अत्यंत विनाशकारी कीट
साल बोरर एक अत्यंत विनाशकारी कीट है, जो मुख्य रूप से साल के पेड़ों पर हमला करता है। इसे साल के जंगलों का सबसे खतरनाक कीट माना जाता है। अमरकंटक के जंगलों में करीब 40 लाख साल के वृक्ष हैं, ऐसे में यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो व्यापक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
यदि नहीं काटे गए तो अन्य पेड़ों पर भी बढ़ सकता है खतरा
वनमंडलाधिकारी डेविड चनाप ने बताया कि अब तक लगभग 60 हजार साल वृक्ष साल बोरर के संक्रमण से प्रभावित पाए गए हैं, लेकिन 9535 पेड़ इससे अधिक संक्रमित है और अन्य पेड़ों पर संक्रमण स्टार अभी प्रारंभिक स्तर में है जिसे रोका जा सकता है। संक्रमित पेड़ों को उनकी स्थिति के अनुसार टी-1 से टी-6 श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि साल बोरर कीट का जीवनकाल करीब डेढ़ वर्ष होता है और यदि अंडे देने से पहले वयस्क कीटों को पकड़ लिया जाए तो संक्रमण की श्रृंखला को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डीएफओ के अनुसार संक्रमण रोकने के लिए 16 वन समितियों को विशेष अभियान में लगाया गया है। अब तक 24 हजार से अधिक साल बोरर कीट पकड़े जा चुके हैं। वहीं अंडों से निकलने वाले लार्वा एवं पीपा अवस्था को नियंत्रित करने के लिए विभाग वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आगे की रणनीति तैयार कर रहा है।
देहरादून की टीम ने पहुंचकर की जांच, अब जबलपुर की टीम आएगी
हाल ही में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून की विशेषज्ञ टीम ने अमरकंटक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन किया। वहीं, बारिश के बाद स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, जबलपुर की टीम भी क्षेत्र का दौरा कर वैज्ञानिक उपायों पर अध्ययन करेगी। देहरादून की टीम के जाने के बावजूद अभी तक इसे रोकने के लिए अन्य कोई उपाय नहीं किया जा रहे हैं बल्कि कीड़ों को पकड़ने के साथ ही ट्रिप ट्री पद्धति एवं पेड़ों की कटाई की अनुमति पर ही जोड़ दिया गया है।
विशेषज्ञों ने कहा प्रारंभिक स्तर पर नहीं हुई रोकथाम तो खत्म हो जाएगा जंगल
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के सहायक प्राध्यापक डॉ. शिवाजी चौधरी ने बताया कि साल बोरर के संक्रमण को प्रारंभिक अवस्था में रोकना ही सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि मादा साल बोरर वयस्क होने पर 250 से 300 अंडे देती है, जिससे बहुत कम समय में इनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है। यह कीट साल वृक्ष के तने को अंदर से खोखला कर देता है, जिससे अंततः वृक्ष सूखने लगता है।
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उन्होंने बताया कि साल वृक्ष से निकलने वाला गोंद (राल) इन कीटों को आकर्षित करता है। इन्हें नियंत्रित करने के लिए ट्रैप ट्री तकनीक और प्रकाश (लाइट) आधारित ट्रैप प्रभावी माने जाते हैं, क्योंकि यह कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। डॉ. चौधरी ने बताया कि वर्ष 1923-24 में डिंडोरी क्षेत्र में लगभग 70 लाख साल वृक्ष इसी कीट के संक्रमण से प्रभावित हुए थे। अमरकंटक में भी लगभग 40 लाख साल वृक्ष होने के कारण समय रहते नियंत्रण बेहद आवश्यक है।