रायबरेली। सलोन क्षेत्र में 20 हजार फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में पकड़े गए जन सेवा केंद्र संचालक (सीएससी) जीशान के पास से बरामद लैपटॉप, कंप्यूटर व मोबाइल से कई राज खुल सकते हैं। पुलिस सभी को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजेगी। जांच में पता चल सकेगा कि फर्जीवाड़ा में कौन-कौन लोग शामिल थे।
सीएससी संचालक जीशान व वीडीओ विजय सिंह यादव की ओर से सलोन क्षेत्र के नुरुद्दीनपुर, गोपालपुर, लउरेपुर, गढ़ी इस्लामनगर में फर्जी तरीके से 20 हजार जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। मामले में सीएससी संचालक व वीडीओ समेत चार आरोपियों को जेल भेजा गया है।
अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि बांग्लादेशियों को नागरिकता दिलाने के लिए सलोन क्षेत्र से प्रमाणपत्र का खेल चल रहा था। ऐसे में अब पुलिस की नजर जीशान के जन सेवा केंद्र से बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जांच पर टिकी है।
अधिकारियों की सिफारिश पर एटीएस को मिलेगी विवेचना
पुलिस अधिकारियों की सिफारिश के बाद ही एटीएस को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले की विवेचना स्थानांतरित होगी। स्थानीय सलोन पुलिस ने अफसरों को यूपी एटीएस को विवेचना ट्रांसफर करने के लिए सभी दस्तावेज भेज दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि अब आला अधिकारियों को तय करना है कि एटीएस को विवेचना सौंपनी है या नहीं।
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले की हर बिंदु पर जांच की जा रही है। जन सेवा केंद्र से बरामद लैपटॉप, कंप्यूटर समेत अन्य उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
नवीन कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक-रायबरेली