प्रदेश की योगी सरकार ने अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में कृषि और ग्रामीण विकास को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। इसके अलावा हर घर बिजली पहुंचाने की मुहिम में ऊर्जा सेक्टर को बड़ी मदद मिली है। अलग-अलग सेक्टर को दी जाने वाली सब्सिडी से जुड़ी एक रिपोर्ट में यह तस्वीर सामने आई है।
प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों को अपनी प्राथमिकता व आवश्यकता के हिसाब से हर वर्ष सब्सिडी देती है। विभागीय बजट के साथ-साथ अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति घटक योजना के अंतर्गत सब्सिडी दी जाती है। तीनों ही स्तर से दी जा रही सब्सिडी को शामिल करते हुए 21 विभागों को हाल के 5 वर्षों में दी गई सब्सिडी का आकलन किया गया है।
2016-17 से 2020-21 के लिए प्रावधानित सब्सिडी की समग्र रूप से तुलना करें तो पिछली सपा सरकार के अंतिम वर्ष की अपेक्षा भाजपा सरकार ने इन चार वर्षों में 21 विभागों की सब्सिडी में दोगुनी से अधिक की वृद्धि की है। 2016-17 में इन 21 विभागों की कुल सब्सिडी जहां 8044.99 करोड़ रुपये थी, वह 2020-21 में बढ़कर 16726.10 करोड़ पहुंच गई है।
दोनों सरकारों की अलग-अलग प्राथमिकता का संकेत
वर्ष 2016-17 में दी गई सब्सिडी से सपा शासनकाल की प्राथमिकता और बाद में सत्ता में आई भाजपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल की सब्सिडी से दोनों सरकारों की अलग-अलग प्राथमिकता का संकेत मिलता है। पिछली सपा सरकार ने लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन, खादी ग्रामोद्योग, लघु सिंचाई, दुग्ध विकास, मत्स्य व ऊर्जा जैसे विभागों को तवज्जो दी।
वहीं, भाजपा सरकार ने हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, भारी एवं मध्यम उद्योग, ऊर्जा, औद्यानिक एवं रेशम विकास, कृषि, भूमि विकास एवं जल संसाधन, ग्राम्य विकास, सहकारिता तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सब्सिडी में भारी बढ़ोतरी कर समग्र ग्राम्य विकास व कृषक कल्याण को प्राथमिकता दी है।
प्रमुख विभागों को सब्सिडी
विभाग 2016-17 2020-21
लघु उद्योग-निर्यात 35.24 25.35
हथकरघा-वस्त्रोद्योग 7.00 156
भारी व मध्यम उद्योग 9.39 570
ऊर्जा 5673 9050
औद्यानिक व रेशम 66.47 434.01
कृषि 1129.07 2905.91
भूमि विकास जल संसाधन 120.69 600.00
ग्राम्य विकास 253.67 986.55
पशु धन 66.96 30.65
दुग्ध विकास 31.95 2.00
सहकारिता 307.53 560.60
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 108.53 238.95
(राशि करोड़ रुपये)