लखनऊ। नई सोच, नया संकल्प लेकर राजधानी की बेटियां लगातार स्टार्टअप की दुनिया में नए आयाम रच रही हैं। पेश है राजधानी की ऐसी ही स्टार्टअप विमेन की सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी।
सुरक्षित निवेश का तरीका निकाला लखनऊ निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर नेहा मिश्रा ने बीटेक और फिर एमबीए किया। अमेरिका की एक कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में काम कर रहीं थी, लेकिन कोरोना काल में लखनऊ वापसी की। इसी बीच प्रदेश सरकार की नीतियों की जानकारी हुई और द फिन लिट स्टार्टअप 2020 में शुरू किया। नेहा कहती हैं कि यहां काम करने के बाद हमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों और नियो बैकिंग में महिलाओं की वित्तीय साक्षरता पर काम करने का मौका मिल गया। हमारे एप पर वित्तीय साक्षरता से जुड़े कोर्स, निशुल्क कार्यशाला, एआई एडवाइजर और सुरक्षित निवेश जैसी सेवाएं हैं।
हुनर को दिया बाजार, बनीं स्टार्टअप विमेन
जानकीपुरम निवासी अनुष्का श्रीवास्तव कुछ समय पहले तक यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं। अचानक स्टार्टअप विमेन बनने का फैसला किया। अनुष्का कहती हैं कि एनएसएस की स्टूडेंट रहते गांवों में महिलाओं को काम करते देखा, उनका हुनर देखा था। मैं हमेशा सोचती थी कि यदि इनके उत्पादों को बाजार मिल जाए तो तस्वीर बदल सकती है। इसी सोच के साथ ए एनिमिस्ट अर्थ नाम से 2022 में स्टार्टअप शुरू किया। यह एक ई-कॉमर्स प्लेटफाॅर्म हैं, जो सामाजिक सरोकारों के लिए काम कर रहा है। हम 100 से अधिक शिल्पकार व गृहणियों के साथ काम कर रहे हैं। ये वो लोग हैं, जिन्हें बड़ी कंपनियां दस्तावेजों की कमी के कारण लेने से मना कर देती हैं या फिर ये खुद वहां तक पहुंच नहीं पातीं। हम इको फ्रेंडली उत्पाद अपने प्लेटफॉर्म पर बेच रहे हैं, इसका फायदा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में हो रहा है। महज एक साल में हमने बाजार में जगह बनाई है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खुली कमाई की राह
अलीगंज निवासी दीक्षा राय ने 2018 ग्रेजुएशन किया। 2021 में वाऊ (वॉयस ऑफ वर्क) नाम से स्टार्टअप शुरू किया। दीक्षा कहती हैं कि नवम्बर 2022 में हमारे स्टार्टअप से आय होनी शुरू हो गई। दीक्षा ने बताया कि हम मूल्य आधारित प्रचार-प्रसार (वेल्यू बेस्ड मार्केटिंग) की सेवाएं जैसे कंटेंट उपलब्ध कराते हैं। दरअसल मार्केटिंग का फायदा सिर्फ कंपनी को क्यों हो, हमारा मानना है कि यदि कस्टमर कोई एड पर क्लिक करता है तो उससे होने वाली आय का कुछ प्रतिशत ग्राहक को भी मिले। हम युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। कंपनी का प्रचार, कस्टमर को फायदा और कंटेट उत्पादन से रोजगार की कई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की पहल
लखनऊ की डॉली सूरी कोरोना से पहले महज एक गृहिणी थीं, आज उनकी अपनी स्टार्टअप कंपनी है। शुरुआत हुई कोरोना में सामने आई हकीकत से, छोटी-छोटी चीजों के लिए मारामारी, परेशानी से सबक लिया और प्रिजर्व नाम से अपना स्टार्टअप 2021 में शुरु किया। पहला संकल्प लिया कि जितने भी लोग साथ काम करेंगे उसमें 50 फीसदी महिलाएं होंगी। दूसरा संकल्प प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम हो। उन्होंने सौंदर्य उत्पाद मार्केट में उतारे। एक उदाहरण देते हुए कहती हैं कि एक शैंपू बनने में 70 फीसदी पानी व 30 प्रतिशत अन्य चीजें होती हैं। हम जो बना रहे हैं, उसमें पानी को बंद कर दिया, पानी का इस्तेमाल बंद होने से पानी तो बचा ही, साथ ही प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल बंद हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को साथ जोड़ा है, जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं।