लखनऊ। सरकार ने उद्योगों को राहत पैकेज दे दिया, कई फैक्टरियों को शुरू करने की अनुमति भी मिल गई, मगर मजदूरों की कमी की वजह से उत्पादन ही शुरू नहीं हो पा रहा है। लंबे समय से लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को जब घर वापसी का मौका मिला तो वे निकल गए, अब फैक्टरियों में काम करने के लिए मजदूर ही नहीं मिल रहे। अमौसी, तालकटोरा, चिनहट इंडस्ट्रियल एरिया में जो उद्योग धंधे हैं, उनका काम लगभग ठप पड़ा है। एक ओर उन्हें लेबर नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कच्चे माल, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केट नहीं मिलने जैसी समस्याएं भी खड़ी हैं। उद्योगपतियों ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में अपनी समस्याएं गिनवाईं। पेश है एक रिपोर्ट। मजदूरों को काम पर वापस लाने की व्यवस्था हो सरकार की ओर से भले ही आर्थिक पैकेज की घोषणा कर दी गई, लेकिन बगैर मजदूरों के उद्योग धंधों को चला पाना नामुमकिन है। ऐसे में मजदूरों को वापस काम पर लाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाना होगा। कोरोना की वजह से जो मजदूर करीब दो महीने से लॉकडाउन में फंसे हुए थे, जब उन्हें बाहर निकलने का मौका मिला तो सीधे अपने घरों की ओर चले गए। अब सरकार चाहे भी तो उन मजदूरों को जल्द से जल्द वापस काम पर नहीं ला सकती। ऐसे में उद्योग धंधे से प्रोडक्शन की उम्मीद कम ही रहेगी। हालांकि सरकार की ओर से बस व पास की व्यवस्था है। लेकिन मजदूरों के मन में जो डर बैठ गया है उसे निकाल पाना इतना आसान नहीं होगा। - शिवशंकर अवस्थी, अध्यक्ष, अमौसी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन लेबर ही नहीं, कच्चे माल की भी कमी सरकार के आर्थिक पैकेज से उद्योगों में जान आ जाएगी। लेकिन फिलहाल उद्योग धंधों को चलाने वाले मजदूर ही नहीं हैं। वह अपने घरों को चले गए हैं। तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में पेंट, प्लाई, दवा, मसाला और फर्नीचर इंडस्ट्रीज हैं। कुल 620 फैक्ट्री इस एरिया में हैं। करीब दो हफ्ते पहले 70 फैक्टरियों को शुरू करने की अनुमति मिल गई। इसमें से 31 चालू भी कर दी गईं। लेकिन असल समस्या यह है कि एक ओर जहां लेबर की कमी से इंडस्ट्रीज जूझ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ ट्रांसपोर्टेशन और कच्चे माल की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐसे में प्रोडक्शन करना बहुत मुश्किल हो रहा है। - यूनुस सिद्दीकी, अध्यक्ष, तालकटोरा एस्टेट इंडस्ट्रीज ओनर्स एसोसिएशन माल के बाजार भी उपलब्ध कराना होगा चिनहट इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूरों की कमी के अलावा कई अन्य समस्याएं भी हैं। कच्चा माल नहीं मिलने से प्रोडक्शन ठप पड़ा हुआ है। अगर कहीं से कच्चे माल की व्यवस्था हो भी जाए तो बिक्री के लिए मार्केट नहीं है। चूंकि लॉकडाउन की वजह से सारे बाजार बंद हैं। जब खपत ही नहीं होगी तो प्रोडक्शन का क्या करेंगे। इसलिए जरूरत है कि सरकार मजदूरों की व्यवस्था के साथ-साथ मार्केट भी उपलब्ध कराए। चिनहट इंडस्ट्रियल एरिया की बात करें तो यहां टाटा के बड़े प्लांट हैं। लेकिन फ़िलहाल उन्हें नहीं चलाया जा रहा है। मेरी खुद की ट्रांसफार्मर बनाने की फैक्ट्री है। लेकिन मेरा सरकार में बहुत फंड फंसा हुआ है। ऐसे ही और उद्योगों का जो पैसा सरकारी तंत्र में फंसा हुआ है। अगर वह निकल आए तो उससे उद्योगों में लगाया जा सकता है। - संजीव अग्रवाल, कोषाध्यक्ष, आईआईए व चिनहट इंडस्ट्रीज एसोसिएशन टास्क फोर्स ने संभाला मोर्चा उद्योग धंधों में कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जो गाइडलाइन बनाई गई है। उसका पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए उद्योगपतियों ने टास्क फोर्स बनाई है। तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में ऐसी टास्क फोर्स अटल गुप्ता के नेतृत्व में काम कर रही हैं, जिसने अब तक 21 कारखानों का निरीक्षण किया है। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर आदि की जांच की जा रही है। एक नजर : इंडस्ट्रियल एरिया फैक्टरी मजदूर अमौसी 325 35 से 40 हजार चिनहट 175 25 से 35 हजार तालकटोरा 620 70 से 80 हजार कहां क्या हैं : 1. अमौसी इंडस्ट्रियल एरिया: सरिया फैक्ट्री, केमिकल फैक्ट्री, दाल मिलें। 2. तालकटोरा : पेंट, प्लाई, दवा, सब्जी मसाले, फर्नीचर। 3. चिनहट : ऑटो कॉम्पोनेंट, ट्रांसफार्मर।