रायबरेली। फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का अब अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आया है। असम, बंगाल और बिहार से भी इसके तार जुड़े हैं। अब तक की जांच में पूर्वांचल के जिलों में फर्जीवाड़े की जड़ काफी गहरी मिली है। पकड़े गए 15 आरोपियों में आठ अकेले पूर्वांचल के रहने वाले हैं। पूरे गिरोह का भंडाफोड़ के लिए एटीएस के साथ सलोन पुलिस जुटी है।
सलोन के नुरुद्दीपुर, सिरसिरा, गढ़ी इस्लामनगर, गोपालपुर, लहुरेपुर में जिस तरह से 19 हजार फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया, उसने रायबरेली में घुसपैठ की आशंका जताई जा रही है। मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो यूपी एटीएस ने भी जांच शुरू की। इसके बाद ताबड़तोड़ छापा मारकर आरोपियों को दबोचना शुरू किया। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की घुसपैठ को लेकर भी जांच एजेंसी ने केरल, कर्नाटक, मुंबई तक में जांच की। इस दौरान उन फाइलों को भी पलटा गया, जिनमें फर्जीवाड़ा की आशंका जताई गई थी।
गिरोह के सरगना की तलाश
अब तक की जांच में पता चला कि गिरोहबंद होकर मामले को अंजाम दिया गया है। सरगना की तलाश में एटीएस व पुलिस लगी हुई है। पता चला है कि शातिरों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कमजोर कड़ियों को भी परखा और फिर साजिशन सलोन को ही फर्जी प्रमाणपत्र के लिए चुना। रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को नागरिकता दिलाने की भी कोशिश हुई।
असल में रायबरेली में घुसपैठ 90 के दशक से हो रही है। पुलिस की अनदेखी से कभी भी घुसपैठियों को पनाह देने वालों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। दो माह पहले ही खीरों में एक बांग्लादेशी परिवार पकड़ा गया था, जिसे जेल भेजा गया। लेकिन जमीनी स्तर पर मामले की जांच नहीं की गई। उसी दौरान खुफिया विभाग जांच करता तो जीशान का खेल खुल जाता।
इन जिलों में रोहिंग्या की बन रही जमीन
फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में कई जिले जांच के दायरे में आ गए हैं। जीशान ने पूछताछ में कई राज खोले हैं। अब पुलिस और जांच एजेंसी उसी आधार पर आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार रोहिंग्याओं ने रायबरेली, बरेली, अंबेडकरनगर, उन्नाव, श्रावस्ती, कुशीनगर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, मुरादाबाद, बहराइच और गोरखपुर में भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर घुसपैठ की कोशिश की है।