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लॉकडाउन में रोजाना बच रहा 200 एमएलडी पानी, कूड़ा भी हो रहा कम

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लखनऊ। लॉकडाउन के कारण दुकानें, रेस्टोरेंट, बाजार बंद हैं। न शहरवासी शहर में निकल रहे हैं और न दूसरे शहरों के लोग आ रहे हैं। ऐसे में शहर में निकलने वाले कचरे की मात्रा प्रतिदिन 300 मीट्रिक टन तक कम हो गई है। वहीं पानी की खपत में भी कमी आई है। व्यावसायिक गतिविधियों वाले प्रतिष्ठान बंद होने से सबमर्सिबल के जरिये रोजाना निकाले जाने वाले करीब 200 एमएलडी पानी की बचत हो रही है। सामान्य तौर पर शहर में रोज करीब 1300 मीट्रिक कचरा निकलता है, लेकिन लॉकडाउन में इस समय करीब 1000 मीट्रिक टन ही निकल रहा है। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण बताते हैं कि इस समय जो कचरा निकला रहा है वह घरों का है और झाड़ू लगने से सड़कों, कॉलोनियों और मोहल्लों का कचरा है। उसके अलावा जो कचरा बाजार, रेस्टोरेंट, ऑफिस, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन व ठेले-खोमचे वालों और पटरी दुकानदारों से निकलता था, वह नहीं निकल रहा है। इससे करीब 300 मीट्रिक टन कचरा कम हुआ है।   सड़ने वाला कचरा अधिक, रीसाइकिल वाला कम शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण मोहान रोड के शिवरी गांव स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट में किया जाता है। प्लांट चलाने वाली चीनी कंपनी ईकोग्रीन एनर्जी के वरिष्ठ प्रबंधक अभिषेक सिंह कहते हैं कि पहले 200 से 250 टन रीसाइकिल वाला कचरा यानी प्लास्टिक आदि आता था, लेकिन इस समय वह नहीं आ रहा है। इस समय सड़ने वाला कचरा अधिक होता है। -गर्मी में भी पानी के संकट से राहत होली के बाद हर साल पानी की किल्लत बढ़ जाती थी। लॉकडाउन से इस बार पानी का संकट नहीं हुआ, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सबमर्सिबल के बंद होने से पानी की बचत हो रही है। जलकल के महाप्रबंधक एसके वर्मा कहते हैं कि जलकल विभाग पहले की तरह ही रोज करीब 705 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहा है। वह कहते हैं कि मीटर सिस्टम न होने से यह तो नहीं बता सकते हैं कि पानी की खपत घरों में कितनी कम हुई, लेकिन यह जरूर है कि पानी संकट को लेकर शिकायतें नहीं आ रही हैं। पहले तो गर्मी शुरू होते ही चार-पांच इलाकों से शिकायतें आने लगती थीं। रोज बच रहा 200 एमएलडी पानी जलकल के सचिव ओपी सिंह कहते हैं कि होटल, रेस्टोरेंट, बड़े हास्पिटल, गेस्ट हाउस व अन्य प्रतिष्ठानों ने पानी के सबमर्सिबल लगा रखे हैं। ऐसे में जब यह बंद हैं तो इनसे रोजाना अनुमान के तहत करीब 200 एमएलडी पानी की बचत हो रही है।
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