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वट सावित्री व्रत 22 को

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लखनऊ। सुहाग की मंगलकामना और दीर्घायु के लिए मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत 22 मई को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनें महिलाएं निर्जल व्रत रहकर बरगद की पूजा कर पति के लिए अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। लॉकडाउन को देखते हुए ज्योतिषियों ने कॉलोनी, मुहल्ले और गांव में सामुदायिक रूप से बरगद के पेड़ का पूजन करने के बजाय घरों में ही उसकी डाल का पूजन करना श्रेयस्कर बताया है। इसी दिन शनि जयंती मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य प्रदीप तिवारी ने रविवार को बताया कि जेठ कृष्ण पक्ष अमावस्या 22 मई को वट सावित्री व्रत मनाया जाना श्रेयस्कर रहेगा। पूजा के लिए एक दिन पहले सूर्यास्त से पहले बरगद की डाल तोड़कर घर ले आनी चाहिए। इससे पूर्व वृक्ष देवता से क्षमा याचना कर डाल तोड़ने का विधान है। घर में जिस महिला को भी पूजा करनी है, उनकी 12 अंगुल से अधिक ऊंचाई की ही डाल को पूजा करने के लिए उपयोग में लाना चाहिए। जिसमें अधिक से अधिक पत्ते भी हो। एक ही घर में एक से अधिक महिलाएं पूजन कर रही हैं तो कोशिश करें जिस डाल में अंकुर हो उसका प्रयोग करें। शनि जयंती 22 को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या शनि जयंती 22 मई को है। शनि देव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं। आचार्य प्रदीप ने बताया कि शनि महाराज का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ था। शनि जयंती के दिन शनि देव की विशेष पूजा करने से ग्रह शांत होते हैं। उनकी पूजा के लिए जातक को 5, 7, 11, 21 और 51 की संख्या में काली सरसों के तेल के दीपक शनि प्रतिमा के सामने या पीपल के पेड़ के नीचे जलाकर उनको नमन करना चाहिए। 
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