गोरखपुर में तैनात राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक कार्यालय के प्रबंधक (तकनीकी) बिजेंद्र सिंह, वाराणसी स्थित मंडलीय कार्यालय के प्रबंधक जय प्रताप सिंह चौहान और निजी कार्यालय सहायक मुकेश कुमार को सीबीआई ने 50 हजार रुपये की घूस लेने के आरोप में बुधवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। बिजेंद्र सिंह को सीबीआई ने गोरखपुर में 50 हजार रुपये घूस लेते हुए ट्रैप किया, जबकि बाकी दोनों वाराणसी से गिरफ्तार किए गए हैं। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। बीते 24 घंटे से गोरखपुर और वाराणसी स्थित उनके ठिकानों को सीबीआई खंगाल रही है।
बता दें कि कुशीनगर के तमकुहीराज निवासी धनंजय राय ने राजधानी स्थित सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच में शिकायत की थी कि उनका पेट्रोल पंप बीते वर्ष स्वीकृत हुआ था। उन्होंने गोरखपुर के एनएचएआई कार्यालय में पेट्रोल पंप खोलने के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए करीब आठ माह पूर्व आवेदन किया था, जिसे प्रबंधक (तकनीकी) बिजेंद्र सिंह जारी करने में लगातार आनाकानी कर रहे हैं। कुछ दिन पहले जब मैंने इस बाबत उनसे मुलाकात की तो उन्होंने 1.50 रुपये रिश्वत मांगी।
सीबीआई ने जब शिकायत की सत्यता की पड़ताल की तो पाया कि इसमें वाराणसी मंडलीय कार्यालय के प्रबंधक जय प्रताप सिंह चौहान और निजी कार्यालय सहायक मुकेश कुमार (संविदा कर्मचारी) की मिलीभगत है। इसके बाद सीबीआई ने बिजेंद्र सिंह को ट्रैप करने की योजना बनाई और बुधवार देर रात धनंजय राय को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।
वहीं सीबीआई की दूसरी टीम ने वाराणसी से जय प्रताप सिंह चौहान और मुकेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप के लिए एनओसी गोरखपुर कार्यालय की संस्तुति के बाद वाराणसी से जारी होती है। तीनों एनओसी मांगने वालों से लाखों रुपये रिश्वत लेते हैं। तत्पश्चात सीबीआई ने तीनों के आवास पर छापा भी मारा, जो बृहस्पतिवार देर रात तक जारी था।