अपनी करतूतों से जिस अफसर ने ‘ऊपरवालों’ को नाराज किया, उसे पुलिस विभाग की ‘सजायाफ्ता’ सेल में डाल दिया जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसकी रैंक क्या है। यह बदनाम सेल है- पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय। इस शाखा में अफसरों की इस कदर भरमार है कि यहां एसपी से ज्यादा डीआईजी और डीआईजी से ज्यादा एडीजी हो गए हैं। इसके उलट कई शाखाओं में अफसरों का अकाल है।
प्रशिक्षण निदेशालय में इन दिनों यहां 2 डीजी, 9 एडीजी, पांच डीआईजी और दो एसपी तैनात हैं। नियम केअनुसार यहां डीजी का एक, एडीजी का तीन, आईजी के पांच और डीआईजी के दो पद होने चाहिए। यह स्थिति भी तब है जबकि पुलिस विभाग में कई पद तैनाती का इंतजार कर रहे हैं। मसलन, एडीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन का पद लंबे समय से खाली है। फिलहाल एडीजी कार्मिक राजा श्रीवास्तव के पास इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी है। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में डीजी का पद खाली पड़ा है।
इसका अतिरिक्त चार्ज भर्ती बोर्ड के चेयरमैन आरके विश्वकर्मा के पास है। पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त चार्ज डीजीपी के जीएसओ एन. रविंदर के पास है। यहां तैनात रहे बीपी जोगदंड को एक अगस्त को कानपुर का पुलिस आयुक्त बनाने के बाद से ही यह पद खाली है।
ट्रेनिंग में तैनात डीजी और एडीजी
डीजी प्रशिक्षण निदेशालय आरपी सिंह, मुख्यालय पर तैनात डीजी संजय एम तरडे, एडीजी तनुजा श्रीवास्तव, एडीजी पीटीएस मेरठ अंजू गुप्ता, एडीजी पीटीएस सुल्तानपुर अजय आनंद, एडीजी पीटीसी सीतापुर जकी अहमद, एडीजी एटीसी सीतापुर सुजीत पांडेय, बीआर अकादमी में तैनात जय नारायण सिंह, एडीजी पीटीसी मुरादाबाद रवि जोसेफ लोक्कु, एडीजी पीटीएस जालौन ज्योति नारायण, एडीजी पीटीएस उन्नाव नवनीत सिकेरा।
एक माह से प्रतीक्षारत हैं दो एडीजी
लखनऊ पुलिस आयुक्त के पद से हटाए गए डीके ठाकुर और कानपुर पुलिस आयुक्त के पद से हटाए गए विजय सिंह मीणा प्रतीक्षारत हैं।