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UP: जहां हमले ज्यादा, वहां बंदरों को मारने की भी अनुमति; प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने दिए निर्देश

Sat, 18 Apr 2026 08:51 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

प्रदेश सरकार ने बंदरों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए अंतरिम कार्ययोजना बनाई है। ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में सीमित अवधि के लिए बंदरों को मारने की अनुमति दी गई है। हेल्पलाइन, पकड़ने की व्यवस्था, जनजागरूकता, कूड़ा प्रबंधन और निगरानी समितियां भी बनाई जाएंगी।
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फाइल फोटो। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका पर 17 फरवरी को पारित आदेश का पालन करते हुए प्रदेश सरकार ने मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए अंतरिम कार्ययोजना तैयार की है। कार्ययोजना में तात्कालिक, निरोधात्मक और दीर्घकालीन उपायों को शामिल किया गया है ताकि बंदरों से होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

दीर्घकालीन उपायों के तहत अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सीमित अवधि के लिए बंदरों को मारने की अनुमति देने का भी प्रावधान किया गया है। यही नहीं, बंदरों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी व्यवस्था लागू की जाएगी। कुछ परिस्थितियों में पकड़े गए बंदरों को रेस्क्यू सेंटर में आजीवन रखा जाएगा। इसको लेकर शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने निर्देश जारी किए हैं।

हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा

 

तात्कालिक उपायों के तहत सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को एक महीने के भीतर संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने, बंदरों की संख्या का आकलन करने और सूचना के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। स्थानीय निकायों को बंदरों को पकड़ने में दक्ष व्यक्तियों और संस्थाओं का पंजीकरण भी करना होगा।

जनजागरुकता अभियान, लक्ष्य आधारित संपर्क कार्यक्रम और कूड़ा प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई है। साथ ही फलों के पौधों का रोपण और धार्मिक मान्यताओं के कारण बंदरों को भोजन कराने के लिए नगरीय निकायों द्वारा निर्धारित स्थान तय किया जाएगा।

मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें वन, पुलिस, पशुपालन और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। सुनील चौधरी ने सभी वन अधिकारियों और निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि प्रगति रिपोर्ट संबंधित जिलाधिकारी व उच्च अधिकारियों को समय-समय पर उपलब्ध कराएं।

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