प्रयागराज में राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या की साजिश रचने वाले माफिया अतीक अहमद को कमिश्नरेट बनने का फायदा मिला। अतीक के खिलाफ शासन के निर्देश पर चल रही कार्रवाई कमिश्नरेट के गठन की घोषणा के बाद अचानक सुस्त पड़ गयी जिससे उसे अपना गैंग मजबूत करने और उमेश पाल की हत्या की सटीक योजना बनाने का मुफीद मौका मिल गया।
उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो माफिया अतीक अहमद के खिलाफ प्रयागराज पुलिस की कार्रवाई कमिश्नरेट के गठन के साथ ही सुस्त पड़ गयी थी। कमिश्नरेट के गठन से पूर्व अतीक की 500 करोड़ की संपत्तियों को चिन्हित कर जब्त करने का निर्देश डीजीपी मुख्यालय ने प्रयागराज पुलिस को दिया गया था। तत्कालीन एडीजी जोन प्रेम प्रकाश, आईजी रेंज राकेश कुमार सिंह और एसएसपी शैलेष पांडेय ने करीब 450 करोड़ की संपत्तियों को जब्त भी कर लिया था।
इतना ही नहीं, अतीक के खिलाफ दर्ज मुकदमों के विवेचकों को भी तेजी से जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। करीब छह माह की अवधि के दौरान अतीक की प्रयागराज के अलावा नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, लखनऊ आदि की बेशकीमती संपत्तियों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करने की तैयारी भी थी। अचानक कमिश्नरेट बनने से ये कवायद ठप पड़ गयी, जिससे अतीक गैंग को संभलने का मौका मिल गया।
कमिश्नरेट बनने के बाद प्रयागराज में तैनात रहे वरिष्ठ अधिकारियों को बदला जाने लगा। नई टीम में पुराने अधिकारियों को जगह नहीं मिलने से बड़े शहरों में स्थित उसकी संपत्तियों को जब्त नहीं किया जा सका।
आसानी से फरार हो गए शूटर
कमिश्नरेट बनने के बाद मची उथल-पुथल में माफिया और अपराधियों पर पुलिस की पकड़ ढीली पड़ने लगी। इससे अतीक का गिरोह फिर से संगठित हुआ और उन्होंने इसका फायदा उठाकर उमेश पाल को मारने की साजिश रची। वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस अधिकारी जब तक हालात की गंभीरता को समझ पाते, शूटर आसानी से फरार हो गए। वारदात होने के करीब पांच घंटे बाद जब लखनऊ स्थित एसटीएफ मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रयागराज पहुंचे तो रास्ते में उनको कहीं भी नाकेबंदी देखने को नहीं मिली।