सरकार ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में निर्माणाधीन अंत्येष्टि स्थलों और सरकारी भवनों के गुणवत्ता की नये सिरे से जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में नगर विकास विभाग की ओर से सभी जिलों के डीएम को आदेश जारी किए गए हैं। जिसमें नगर निकाय सीमा में बन रहे सभी अंत्येष्टि स्थलों पर भवनों के साथ ही राजकीय भवनों के निर्माण के गुणवत्ता परखने को कहा गया है। ऐसे भवनों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए डीएम को अपने स्तर से विशषेज्ञों को नामित करने के लिए कहा गया है।
शासन ने कहा है कि जांच के दौरान इस बात की पुष्टि अवश्य कर लिया जाए कि संबंधित भवन का निर्माण मानक के मुताबिक हो रहा है और यह सुरक्षित है। जांच के दौरान मानक के मुताबिक गुणवत्ता न पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था के साथ ही निर्माणाधीन कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। शासन ने इस संबंध सभी नगर निकायों से अधोमानक वाले निर्माणों और संबंधित अधिकारियों की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा है।
दरअसल शासन के पास मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, कौशांबी, एटा, हाथरस समेत कई जिलों में अंत्येष्टि स्थल और वहां पर विश्राम गृह आदि का निर्माण कराया जा रहा है। इसी प्रकार कई शहरों में नगर निकायों के भवनों का काम चल रहा है। इनमें कई निर्माणों की गुणवत्ता के गड़बड़ी किए जाने की शिकायतें शासन तक पहुंची है। इसके आधार पर शासन ने सभी निर्माणों की गुणवत्ता की नए सिरे से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शहीद स्मारकों का भी होगा कायाकल्प
शासन ने शहरी क्षेत्रों में स्थित सभी शहीद स्मारकों का भी सूची तैयार करने को कहा है। साथ ही इनके साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और मरम्मत आदि की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने नगर निकायों को यह भी निर्देश दिए हैं कि उन स्मारकों जिन शहीद स्मारकों में शहीदों के नाम पट्टिकाएं स्पष्ट नहीं हो रही हैं या धूमिल हो गई हैं। उनके नाम नई पट्टिका में अंकित कराते हुए शहीद स्मारकों में लगाई जाए।