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UP News : कई जिलों तक पहुंचेगी पावर ऑफ अटॉर्नी मामले में जांच की आंच, एक्शन में आने वाली है एसआईटी

Mon, 09 Jan 2023 01:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के रजिस्ट्रेशन पर लगी रोक के बाद शुरू हुई जांच की आंच अन्य कई जिलों तक पहुंच सकती है। एसआईटी को ऐसे अन्य जिलों में भी निगाह रखने को कहा गया है, जहां की संपत्तियों के मुख्तारनामे ताबड़तोड़ ढंग से निकटवर्ती राज्यों में हुए हैं।

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 स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने बताया कि गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में पिछले तीन माह में 25000 से ज्यादा लोगों ने पावर ऑफ अटॉर्नी कराई। ऐसे मेें शक हुआ तो विशेष जांच समिति का गठन कर जांच शुरू करा दी गई है।

सामने आ रहा है कि इन दोनों जिलों की संपत्तियों के मुख्तारनामे फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली आदि के निवासियों ने कराए हैं। अब हरिद्वार, देहरादून आदि में भी टीम जाकर यह देख सकती है कि यूपी के जिलों से जुड़ी संपत्तियों की कितनी पावर ऑफ अटॉर्नी वहां रजिस्टर्ड कराई गई हैं।
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 पिछले दिनों भी यह सामने आया था कि मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व शामली आदि की संपत्तियों से जुड़ी पावर ऑफ अटॉर्नी उत्तराखंड के लोग रजिस्टर्ड करा रहे हैं। इरादा संपत्ति का गलत ढंग से हस्तांतरण करना है। स्टांप मंत्री के मुताबिक टीम को कहा गया है कि बाकी जिलों पर भी ध्यान दें। दरअसल, इन जिलों में यमुना नदी के तटवर्ती क्षेत्र में जिला प्रशासन ने संपत्ति के क्रय-विक्रय पर रोक लगाई है। जिसका तोड़ मुख्तारनामे के रूप में निकाला गया।

अन्य सीमावर्ती जिलों में भी इसी तरह के खेल की सूचना सामने आ रही है। मालिकाना हक को इस तरीके से एक दूसरे को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इससे मालिकाना हक स्थानांतरित नहीं होता है, पर लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

स्टांप शुल्क बचाने का भी खेल
स्टांप शुल्क बचाने के लिए भी मुख्तारनामा कराने का बड़ा खेल चलता है। जांच में यह भी विषय शामिल रहेगा कि यदि रक्त संबंध से अलग किसी को मुख्तार बनाया गया है तो उसकी जांच जरूर की जाए। आखिर किस कारण से मुख्तारनामा कराया गया है और इसके पीछे का असली उद्देश्य क्या है। यह भी देखा जाएगा कि कहीं आवासीय समितियां तो पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं करा रही हैं। यदि ऐसा है तो यह निश्चित रूप से स्टांप शुल्क बचाने का खेल है।

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