प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी के बाद भी डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में डेंगू नियंत्रण में लगी टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। जहां भी मरीज मिलेंगे, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम एंटी डेंगू अभियान चलाएगी। इसके तहत साफ-सफाई से लेकर एंटी लार्वा का छिड़काव कराएगी। प्रदेश में रविवार को 3433 मरीजों की रैपिड डायग्नोस्टिक जांच की गई, जिसमें 14 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है।
प्रदेश में दिसंबर तक डेंगू के 20 299 मरीज मिले हैं , जबकि 32 मरीजों की मौत हुई है। पिछले वर्ष जनवरी से 10 मार्च तक प्रदेश में 42 डेंगू मरीज मिले थे, लेकिन इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 110 हो गई है। संतोष की बात यह है कि पिछले वर्ष मार्च में एक मरीज की मौत हो गई थी, लेकिन इस बार अभी किसी भी व्यक्ति की मौत नहं हुई है। इस वर्ष अभी तक सर्वाधिक 20 मरीज लखनऊ में मिले हैं।
इसी तरह अलीगढ़ में 17, गौतमबुद्ध नगर में 16, कानपुर में सात, इटावा में पांच, बुलंदशहर में चार मरीज मिले हैं। अन्य जिलों में एक से दो मरीज मिले हैं। संयुक्त निदेशक (डेंगू) डा. विकास सिंघल ने बताया कि मरीजों के मिलने का सिलसिला बरकरार होने की वजह से विभाग की टीम को लगातार सक्रिय किया गया है। जहां भी डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वहां विभाग की टीम पहुंच रही है।
डेंगू फैलने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। लोगों को बचाव के तरीके समझाए जा रहे हैं। अभी तक जहां भी मरीज मिले हैं, उसकी बड़ी वजह संबंधित लोगों के घरों के आसपास छत पर कबाड़ पाया गया है। बारिश के समय कबाड में पता डेंगू का लार्वा गर्मी में भी नष्ट नहीं हुआ है। यही नमी मिलने पर मच्छर को बढावा दे रही है। दूसरी बडी वजह यह भी देखी जा रही है कि लोग घर के ऊपर बागवानी करते हैं, लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं रख रहे हैं।
प्रदेश में रविवार को 3433 मरीजों की रैपिड डायग्नोस्टिक जांच की गई, जिसमें 14 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में 150872 मरीजों का उपचार किया गया, जिसमें गंभीर बीमारी से ग्रसित 1100 मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेपर किया गया। मेले में 9037 मरीज बुखार के आए। इस दौरान 6613 गोल्डेन कार्ड वितरित किए गए। मेले में कुल 5898 चिकित्सक तथा 11364 पैरामेडिकल स्टाफ एवं 4198 आईसीडीएस स्टाफ को लगाया गया।