निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद सबकी नजरें उन महिला प्रत्याशियों पर रहीं, जिनका नाम चुनाव के दौरान खासी चर्चा में था। कानपुर में रिवाल्वर वाली मेयर के नाम से मशहूर प्रमिला पांडेय को जनता ने दोबारा चुना। पार्टी में भितरघात की आहट भी उनके आत्मविश्वास को डिगा नहीं सकी। सबसे ज्यादा चर्चा में प्रतापगढ़ का चुनाव रहा, जहां पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के विरोधी गुलशन यादव की पत्नी सीमा यादव ने कुंडा नगर पंचायत के चेयरमैन के चुनाव में जीत का परचम लहराया। सीमा यादव की जीत से प्रतापगढ़ की भविष्य की सियासत के समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व ओएसी अभिषेक कौशिक की पत्नी डॉ. अनुकृति चौधरी ने सहारनपुर की सैदनगली नगर पंचायत के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर अपनी सियासी पारी शुरू की है। निकाय चुनाव के नतीजे आने से पहले सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह और भाजपा नेता दीपक सिंह के बीच थाने में हुई मारपीट ने खासी सुर्खियां बटोरी। अमेठी पुलिस के हिस्ट्रीशीटर दीपक सिंह की पत्नी रश्मि सिंह ने सपा प्रत्याशी तारा को नगर पालिका परिषद के चुनाव में मात देकर अपना वर्चस्व कायम कर लिया।
वहीं, चुनाव से पहले ट्विटर पर सपा नेताओं के निशाने पर आईं भाजपा युवा मोर्चा की सोशल मीडिया हेड रिचा राजपूत को चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा। वह औरैया की नगर पंचायत अटसू से भाजपा प्रत्याशी थीं। लखनऊ में बाहुबली सपा नेता अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के परिवार का लगातार 25 साल तक पार्षद की सीट पर कब्जा रहा। इस बार ओबीसी सीट होने पर उन्होंने अपने करीबी को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन सफल नहीं रहे।
प्रयागराज में बदलते रहे समीकरण
चुनाव के दौरान प्रयागराज में लगातार समीकरण बदलते रहे। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की पत्नी अभिलाषा गुप्ता को पार्टी ने दोबारा मेयर का टिकट नहीं दिया। माफिया अतीक की पत्नी शाइस्ता को बसपा ने पहले मेयर प्रत्याशी बनाया था। उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता के नामजद होने के बाद उनका टिकट कट गया। प्रयागराज में एक और सूचीबद्ध माफिया को सपा ने टिकट देकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया था। इसी तरह गोरखपुर में दो हिस्ट्रीशीटरों ने अपनी पत्नी को पार्षद बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतारा था।