बिजली कंपनियों के स्टोरों में मीटर और अन्य सामानों की किल्लत हो गई है। मीटर, ट्रांसफार्मर, पोल व अन्य सामग्री उपलब्ध न होने की वजह से उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन जारी नहीं हो पा रहे है। लोग पैसा जमा करने के बाद भी कनेक्शन के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद कनेक्शन जारी न होने की शिकायत राज्य विद्युत नियामक आयोग से की जाएगी।
नया बिजली कनेक्शन जल्द जारी करने लिए बिजली कंपनियों ने झटपट पोर्टल के जरिए आवेदन की व्यवस्था की है। बड़ी संख्या में उपभोक्ता झटपट पोर्टल पर औपचारिकताएं पूरी करके कनेक्शन के लिए पैसा भी जमा कर चुकेहैं लेकिन बिजली अधिकारी-कर्मचारी मीटर न होने की बात कहकर आवेदकों को टरका रहे हैं। यही नहीं तमाम किसानों को भी नलकूप कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
पूर्ण जमा योजना में ट्रांसफार्मर, पोल तथा अन्य सामानों के लिए एस्टीमेट के अनुसार पूरी धनराशि जमा कर चुके किसानों को भी स्टोर में सामान न होने की बात कहकर टरकाया जा रहा है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में 18399 उपभोक्ताओं ने झटपट पोर्टल के जरिए कनेक्शन के लिए सारी औपचारिकता पूरी करते हुए पैसा जमा कर दिया लेकिन मीटर उपलब्ध न होने की वजह से कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
इसी प्रकार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में भी 11000 से ज्यादा कनेक्शन के आवेदन लंबित हैं। पश्चिमांचल व पूर्वांचल वितरण निगम में भी मीटर की कमी से कनेक्शन जारी नहीं हो पा रहे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि इस मुद्दे पर कई बार पावर कार्पोरेशन व बिजली कंपनियों के प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बाद भी हालात जस के तस हैं। इतना ही नहीं, कई कंपनियों ने तो यह आदेश जारी किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान जो मीटर उतारे गए थे उसे लगाकर नया कनेक्शन दे दिया जाए। यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि अब इसकी शिकायत विद्युत नियामक आयोग से की जाएगी क्योंकि पैसा जमा होने के बाद भी कनेक्शन न मिलना बेहद गंभीर मामला है। वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग कानून बना चुका है कि नियत समय में बिजली कनेक्शन जारी न होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाए लेकिन प्रदेश में अभी तक यह कानून लागू नहीं हुआ है। यह भी अपने आप में गंभीर विषय है।