इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात हजार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं/एएनएम की नियुक्ति पर लगी रोक के खिलाफ दाखिल विशेष अपील मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने सोमवार को यह आदेश उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से विशेष अपील पर दिया।
लखनऊ खंडपीठ ने योगी सरकार को बड़ी राहत देते हुए प्रदेश में सात हजार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं/एएनएम की नियुक्ति पर लगी रोक के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को मंजूर कर लिया है। इन पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी कर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयेाग ने 20 अक्तूबर 2022 को ही महानिदेशक परिवार कल्याण को अपनी संस्तुति भेज दिया था। किंतु न्यायालय की एकल पीठ द्वारा नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा देने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने सोमवार को एकल पीठ के 19 अक्तूबर 2022 के आदेश के खिलाफ आयोग की ओर से दाखिल विशेष अपील को मंजूर करते हुए पारित किया।
एकल पीठ के 19 अक्तूबर 2022 के आदेश के कारण राज्य सरकार सफल अभ्यथियों केा नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर पा रही थी। सुनवायी के दौरान यह बात सामने आयी कि राज्य सरकार को एकल पीठ के 19 अक्तूबर 2022 के आदेश को चुनौती देनी चाहिए था। हालांकि सरकार ने आयोग की अपील का समर्थन किया।
गौरतलब हो कि सरकार ने 2019 में प्रदेश में 9212 पदों पर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा था। आयेाग ने विज्ञापन निकाला और प्री और लिखित परीक्षा कराने के बाद 6 अगस्त 2022 को अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया था। इसके बाद आयोग ने 20 अक्तूबर 2022 को सरकार के महानिदेशक परिवार कल्याण को उक्त रिक्त पदों के सापेक्ष 7,189 अभ्यर्थियों की नियुक्ति किए जाने की संस्तुति भेज दिया था। इस बीच 19 अक्तूबर 2022 केा न्यायालय की एकल पीठ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पूनम द्विवेदी आदि अभ्यर्थियों की ओर से अलग अलग दाखिल याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए आदेश दे दिया कि इन याचीगणों को पूर्व में जारी आय प्रमाणपत्र की जगह नए आय प्रमाणपत्र जारी किए जाएं, जिस पर आयोग विचार कर निर्णय लेगा और उसके बाद ही चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।