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Platelets Crisis : बीसीएस यूनिट तैयार, मशीनें लगने का इंतजार, कई जिलों में प्लेटलेट्स का संकट बरकरार

Sun, 23 Oct 2022 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, लखनऊ

सार

Platelets Crisis : प्रदेश के कई जिलों में अब तक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (बीसीएस) शुरू नहीं हो सकी है। जहां यूनिट शुरू हुई है, वहां मशीनें खराब हैं। इससे प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के लिए दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जल्द ही सभी जिलों में यूनिटें शुरू कर दी जाएंगी।
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प्रदेश के कई जिलों में अब तक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (बीसीएस) शुरू नहीं हो सकी है। जहां यूनिट शुरू हुई है, वहां मशीनें खराब हैं। इससे प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के लिए दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जल्द ही सभी जिलों में यूनिटें शुरू कर दी जाएंगी। जहां मशीनें खराब हैं, वहां ठीक कराई जाएंगी। 

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प्रदेश में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 4800 से अधिक हो गई है। इन मरीजों के अलावा बर्न, हिमोफिलिया सहित अन्य मरीजों को भी प्लेटलेट्स सहित ब्लड के अलग-अलग अवयवों की जरूरत होती है। लेकिन सरकारी अस्पताल इस जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल एवं अन्य अस्पतालों को मिलाकर 52 बीसीएस चल रही हैं। इनमें लखनऊ में सात, प्रयागराज में तीन, कानपुर में दो, वाराणसी में तीन यूनिट हैं। 

अन्य जिलों में एक-दो यूनिट हैं। 28 जिला अस्पतालों में भी यह यूनिट है। 47 जिलों में अभी यूनिट शुरू नहीं हो पाई हैं। जिन जिलों में यह यूनिट लगी हैं, वहां भी मशीनें खराब हैं। चिकित्सा अधीक्षकों का कहना है कि वे उच्चाधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। प्रदेश में निजी क्षेत्र में 277 यूनिट हैं। सरकारी यूनिटों में मशीनें खराब होने का फायदा निजी यूनिट संचालक मुंहमांगी कीमत वसूलते हैं।
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क्यों जरूरी है बीसीएस यूनिट
लोहिया संस्थान के प्रोफेसर डॉ. सुब्रत चंद्रा ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में डोनर काउच, ब्लड कलेक्शन मॉनिटर, ट्रियूबस सीलर, ऑक्टोक्लेब सहित कई तरह के उपकरण लगते हैं। इस मशीन से एक यूनिट ब्लड से फ्रोजल प्लाजमा, प्लेटलेट्स, क्रायोप्रेसिपिटेट (पीआरबीसी) सहित अन्य तत्व निकाले जा सकते हैं। उन्हें लंबे समय से स्टोर किया जा सकता है। ऐसे में थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी आदि की भरपाई की जा सकती है।

जिलों की स्थिति

  • गोरखपुर जिला अस्पताल में लगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खराब है। डोनर होने के बाद भी प्लेटलेट्स नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
  • महराजगंज जिला अस्पताल में यूनिट तैयार है। सात माह पहले आई मशीनें धूल खां रही हैं, लेकिन इन्हें अभी तक इंस्टॉल नहीं किया गया है। अब डेंगू के मरीज बढ़े तो उन्हें दूसरों जिलों में प्लाज्मा व प्लेटलेट्स के लिए भेजा जा रहा है।
  • जौनपुर जिला अस्पताल में बीसीएस मशीन के कुछ पार्ट्स पहुंच गए हैं, लेकिन इन्हें अभी तक इंस्टाल नहीं किया गया है। ऐसे में मरीजों को वाराणसी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
  • मैनपुरी जिला अस्पताल में सालभर से यूनिट तैयार है, लेकिन अभी तक पर्याप्त मशीनें नहीं आ पाई हैं। यूनिट में लगने वाली 25 मशीनों में सिर्फ पांच ही आई हैं। इससे प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए मरीजों को रेफर किया जाता है।

28 जिला अस्पतालों में यूनिट चल रही है। अन्य में मशीनेें पहुंच रही हैं। सभी यूनिटों को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन यूनिटों के शुरू होने के बाद प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की समस्या खत्म हो जाएगी।
- डॉ. वीके सिंह, निदेशक

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