प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने को लेकर सरकार के स्तर से किए जा रहे आर्थिक मैनेजमेंट का असर अब दिखने लगा है। इसका ही नतीजा है कि प्रदेश में पहली बार पिछले साल जून की तुलना में इस साल जीएसटी कंपोजिट स्कीम में 360 और रेग्यूलर जीएसटी में 50 फीसदी का ईजाफा हुआ है। इस प्रकार देखा जाए तो इस साल जीएसटी संग्रह करीब 102 फीसदी बढ़ा है। इस साल जून तक कुल 25,916 करोड़ रुपए जीएसटी की वसूली हुई है। जबकि पिछले साल इस अविध में मात्र 13,341 करोड़ जीएसटी की ही वसूली हो पाई थी।
सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जीएसटी संग्रह से संबंधित शीर्ष 10 सेक्टरों में शामिल पेट्रोलियम उत्पादों जैसे मोबिल, 2टी आयल, ल्यूब्रिकेंट्स और ग्रीस आदि की बिक्री में पिछले साल की अपेक्षा इस साल जून तक करीब 50 फीसदी का उछाल आया है। जबकि आटोमोबाइल सेक्टर में करीब 43 फीसदी, आयरन और स्टील में 41.50 फीसदी, केमिकल में करीब 41 फीसदी, एफएमसीजी में 26, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स में करीब 25, बिल्डिंग मटैरियल में 21 और मशीनरी और पार्ट्स में 16.37 व सर्विस सेक्टर में दो फीसदी अधिक जीएसटी की वसूली हुई है। हालांकि अगर धनराशि के नजरिए से देखें तो सर्विस सेक्टर प्रदेश में पहले पायदान पर है और सबसे अधिक 2433 डीलर जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की आर्थिक नीतियों के कारण वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में जीएसटी में वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार को फार्मा और मेडिकल उपकरणों में पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 334.71 करोड़ का जीएसटी मिला था। लेकिन इस अवधि में कोरोना का संक्रमण की स्थिति करीब सामान्य हो चुकी है। इसलिए इस सेक्टर में पहली तिमाही में मात्र 6.35 फीसदी की जीएसटी की कमी आई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ाने के लिए चलाए गए अभियान की वजह से प्रदेश में अब पंजीकृत व्यापारियों की संख्या 26 लाख से अधिक हो गई है। इसे अगले छह महीने में बढ़ाकर 30 लाख किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में अप्रैल से जुलाई के बीच जीएसटी में 1,03,052 नए कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।