क्षत्रिय समाज में नाराजगी का असर पहले चरण की वोटिंग में साफ नजर आया। सरधना विधानसभा क्षेत्र के चौबीसी का क्षत्रिय समाज पूरी तरह से दोफाड़ दिखा। जिन गांवों में भाजपा को एकतरफा वोट पड़ते थे, वहां बिखराव देखने को मिला। क्षत्रिय समाज के काफी वोटरों ने साइकिल का हैंडल थाम लिया। युवा जहां विरोध में उत्तेजित दिखे, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं ने जरूर कुछ डैमेज कंट्रोल किया।
मेरठ की सरधना विधानसभा सीट मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। गाजियाबाद में जनरल वीके सिंह का टिकट काटकर वैश्य समाज को दिए जाने से क्षत्रिय समाज में विरोध के स्वर यहां जगह-जगह सुनाई दे रहे थे। नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षत्रिय बहुल इलाकों में जनसभा भी की। तमाम जगहों पर पंचायतें हुईं। शुक्रवार को लोकसभा के प्रथम चरण के चुनाव में क्षत्रिय समाज की नाराजगी कई जगह दूसरी पार्टी के वोट बैंक में बदलती नजर आई।
एकजुट नजर आए दलित
विधानसभा चुनाव में दलित समाज का रुख अलग था, तो लोकसभा में स्थिति एकदम उलट रही। अधिकतर गांवों में दलित समाज एकजुट नजर आया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में किसी मुद्दे पर वोट नहीं कर रहे हैं। बल्कि अपनी पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। इन इलाकों में हाथी खूब चिंघाड़ा। प्रजापति समाज ने भी अधिकतर जगहों पर हाथी की सवारी की।
त्यागी समाज के वोटों में भी दिखा बिखराव
सरधना विधानसभा क्षेत्र में त्यागी समाज के वोटों में भी बिखराव दिखा। महादेव हो या फिर नंगला आर्डर-बेगमाबाद। लोगों का कहना था कि अपने समाज की ताकत भी तो दिखानी है। सरधना कस्बे में भी यही स्थिति नजर आई। त्यागी समाज दोफाड़ दिखा।
जाट-ब्राह्मण-गुर्जर, अति पिछड़े दिखे एक साथ
सरधना विधानसभा क्षेत्र में कई समाज के लोग एक ही जगह नजर आए। जाट-ब्राह्मण, गुर्जर और अति पिछड़ों में थोड़ा बहुत ही बिखराव दिखा। अधिकतर जगहों पर एकमुश्त वोट पड़े।
सारे प्रत्याशी मिलने आए थे, हमने किसी को वोट नहीं दिया : टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने मतदान नहीं किया। उनका कहना है कि हर पार्टी का प्रत्याशी समर्थन मांगने किसान भवन आता है, इसी वजह से उन्होंने मतदान नहीं किया। हालांकि उन्होंने किसानों के सम्मान में नई सरकार से अनेक उम्मीदें जताईं। वहीं, संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर के सर्कुलर रोड स्थित चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज में मतदान किया।