उप्र रोडवेज परिवहन निगम की बसों की लोकेशन का अब विदेशी उपग्रह से पता नहीं लगाया जाएगा। इन बसों से गूगल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) हटाकर उनमें व्हीकल लोकेशन ट्रैफिक (वीएलटी) डिवाइस लगाया जाएगा। यह डिवाइस इसरो निर्मित उपग्रह इंडियन रीजनल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) से जुड़ी होगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में रोडवेज की बसों में लगाए गए जीपीएस को फिलहाल रिचार्ज नहीं कराया गया है। ऐसे में सभी जीपीएस बंद हो गए हैं। वर्तमान में रोडवेज कुल 11,200 बसों का संचालन कर रहा है। इन बसों को एडवांस तकनीक से लैस करने बात कही जा रही है। वर्ष 2017 में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) के मानक तय किए गए थे।
यूपी रोडवेज पहली बार एटीएस-140 का पालन कर रहा है। इसमें शर्त है, व्यावसायिक वाहनों को गूगल जीपीएस से नहीं जोड़ा जाएगा। चूंकि यह जीपीएस अमेरिका, ब्रिटेन आदि देशों के उपग्रहों से जुड़कर काम करता है, ऐसे में यहां के वाहनों की लोकेशन हर वक्त इन देशों के पास रहती है। इसलिए अब इन बसों को भारतीय उपग्रह आईआरएनएसएस से जोड़ने के लिए कहा गया है। यूपी रोडवेज पहली बार वीएलटी डिवाइस के जरिए दस हजार बसों को आईआरएनएसएस उपग्रह से जोड़ेगा। रोडवेज के प्रधान प्रबंधक (आईटी) युजवेंद्र सिंह ने बताया कि इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इसमें पैनिक बटन आदि के काम भी शामिल किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने जारी किए 51 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार ने रोडवेज को नई व्यवस्था के लिए 51 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इससे मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के साथ 46 बस स्टेशनों पर एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इससे यह पता चल सकेगा कि रोडवेज की कौन सी बस कहां हैं और कितनी देर में किस स्टेशन पर पहुंच जाएंगी।
सर्दी में सावधानी से बस चलाने के निर्देश
अपर प्रबंध निदेशक अन्नपूर्णा गर्ग ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को पत्र भेजकर सर्दी के मौसम में खासतौर पर कोहरे में सावधानी से बस चलाने के निर्देश दिए हैं। रात में बस की गति 40 किमी प्रति घंटा, हेडलाइट व बैकलाइट आदि दुरुस्त रखने, ऑलवेदर बल्ब लगाने आदि को कहा गया है। बस चालकों को बार-बार ब्लैक स्पॉट की जानकारी देने के लिए कहा गया है।