चुनावी रण में अति पिछड़े किंग मेकर की भूमिका में हैं। वे जिसे चाहें, उसे सत्ता के शिखर तक पहुंचा सकते हैं। बदले समीकरणों में चुनावी बिसात पर उनकी अहमियत और भी बढ़ गई है। यही वजह है कि पहले चरण के चुनाव में सभी दलों ने अति पिछड़ों को लुभाने में अपनी पूरी ताकत झाेंक दी है। अति पिछड़े मतदाता भी अपनी बातें बेबाकी से रख रहे हैं।
गांव डाबका निवासी नरेशपाल कहते हैं कि सुरक्षा के मुद्दे बेहद अहम हैं। हालांकि, इस बार नाराजगी बहुत है और टक्कर कांटे की है। नए वोटर अमन कहते हैं, अति पिछडों का वोट तो सबको चाहिए पर उस हिसाब से प्रतिनिधित्व कम दिया जा रहा है। पांचली निवासी विजयपाल कहते हैं कि अति पिछड़े अपनी बात पर इस बार भी अडिग हैं। जो मुद्दों पर उनके साथ है, वोट उसी को जाएगा।
चरथावल में भाजपा ने फिर से सपना कश्यप को चुनावी मैदान में उतारा है। मुजफ्फरनगर से बसपा ने पुष्पांकर पाल पर दांव खेला है। खतौली में सैनी वोटरों की संख्या को देखते हुए भाजपा ने विक्रम सैनी तथा रालोद ने राजपाल सैनी को चुनावी रण में उतार दिया है। दरअसल, पहले चरण की इन सभी सीटों पर अति पिछड़े वोटों की भारी संख्या है। सहारनपुर में भी अति पिछडों की अहम भूमिका है। बेहट से भाजपा ने नरेश सैनी, नकुड़ से सपा ने धर्म सिंह सैनी गंगोह से कांग्रेस ने अशोक कुमार सैनी को इसी समीकरण के आधार पर टिकट दिया है। कांग्रेस ने थानाभवन सीट से सत्यम सैनी को मैदान में उतारा है, तो बुढ़ाना से देवेंद्र कश्यप को टिकट दिया है। बड़ौत विधानसभा सीट से कांग्रेस ने राहुल कश्यप को मैदान में उतारा है, तो मोदीनगर से नीरज कुमारी प्रजापति को चुनावी रण में उतारा है।
स्वामी प्रसाद को मैदान में उतारने की तैयारी
अति पिछड़े किसी समय में सपा के साथ लामबंद रहे थे। बीच में छिटके, तो भाजपा से मजबूती से जुड़ गए। इस बार रालोद-सपा गठबंधन उन्हें साधने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। पश्चिमी यूपी में अखिलेश और जयंत की जोड़ी रोड शो कर रही है। शामली से इसे शुरू किया गया। बृहस्पतिवार को बुलंदशहर और शुक्रवार को आगरा में रोड शो होगा। पर, पार्टी थिंक टैंक के पास ऐसे इनपुट आ रहे थे कि अति पिछड़ों पर उनकी बातों का असर अन्य जातियों की अपेक्षा कम हो रहा है। ऐसे में उन्हें साधने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या को भी पश्चिम के रण में उतारने पर विचार हो रहा है। मौर्या हाल ही भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं। प्रदेश की जिन 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की कैटेगरी में डालने पर बार-बार विचार हुआ, बार-बार मांग उठी, उनमें से सात-कश्यप, प्रजापति, कुम्हार, धीमर, सैनी, माली और धोबी का मेरठ व उसके आसपास की सभी सीटों पर तगड़ा प्रभाव है।