प्रदेश में संचालित वृद्धाश्रमों को बजट न मिलने से उनकी व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। यह स्थिति तब है, जब सरकार ने इस मद में आवश्यक बजट उपलब्ध करा दिया है। चालू वित्तीय वर्ष के करीब आठ माह बीतने को हैं और 9 जिलों में एक भी माह का बजट नहीं दिया गया है। वहीं 30 जिलों में सिर्फ 4 माह और 5 जिलों में 2 माह के बजट का ही भुगतान किया गया है।
प्रदेश के सभी जिलों में समाज कल्याण विभाग निराश्रित बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम संचालित कर रहा है। इन्हें स्वैच्छिक संस्थाओं (एनजीओ) के माध्यम से संचालित किया जाता है और भुगतान जिलास्तर से किए जाने की व्यवस्था है। वृद्धाश्रम संचालकों का कहना है कि महीनों भुगतान न होने से यहां की व्यवस्थाएं जारी रखने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। अगर यही हाल आगे जारी रहा तो इन वृद्धाश्रमों को बंद करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचेगा।
समाज कल्याण विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में इस मद में 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। इनमें से अभी तक 14 करोड़ 22 लाख 76 हजार 403 रुपये का ही भुगतान हुआ है। गोरखपुर, हाथरस, कासगंज, मथुरा, मैनपुरी, रायबरेली, संतकबीरनगर, गाजीपुर और चंदौली में एक भी माह का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।
फतेहपुर, कानपुर नगर, झांसी, हरदोई, जौनपुर, कौशांबी, सुल्तानपुर, बाराबंकी, सिद्धार्थनगर, प्रयागराज, महोबा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमरोहा, एटा, संभल, पीलीभीत, बरेली, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, चित्रकूट, ललितपुर, उरई-जालौन, औरेया, प्रतापगढ़ और कानपुर देहात को सिर्फ 4 माह और महराजगंज, हमीरपुर, हापुड़, बागपत व अयोध्या को दो माह का ही भुगतान हुआ है। इन स्थितियों में बजट के लैप्स होने की पूरी आशंका बनी हुई है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिलास्तर पर भुगतान के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं, जैसा पहले नहीं होता था। कुछ जिलों में डीएम की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति की बैठक के बाद भुगतान के लिए पत्रावली कोषागार को भेजी जाती हैं। वहीं कुछ जिलों में जिलास्तरीय समिति से इतर भुगतान के लिए समिति बनाई गई है।