मैनपुरी संसदीय और रामपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में सपा के मजबूत गढ़ भेदना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इन सीटों पर अब तक एक बार भी भाजपा का खाता नहीं खुला है। ढाई दशक से सपा के कब्जे में रही मैनपुरी और 1980 से 2022 तक हुए 11 विधानसभा चुनावों में से 10 बार आजम खां और उनके परिवार के पास रही रामपुर सीट को भेदने के लिए भाजपा सरकार और संगठन को कड़ी मशक्कत करनी होगी।
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट और सपा के आजम खां की विधानसभा सदस्यता रद्द होने से खाली हुई रामपुर सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। ऐसे में सपा मैनपुरी में अपना गढ़ बचाने के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। वहीं भाजपा सरकार और संगठन 2024 से पहले सपा का गढ़ भेदने की पुरजोर कोशिश करेगी।
सरकार और भाजपा संगठन ने मैनपुरी सीट पर कब्जा करने के लिए न सिर्फ एक-एक घर सीधे संपर्क की योजना बनाई है, बल्कि सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की भी रणनीति तैयार की है। पार्टी ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को मैनपुरी लोकसभा सीट की कमान सौंपी है। इस लिहाज से मैनपुरी सीट पर सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और जितेंद्र सिंह की भी प्रतिष्ठा दांव पर है।
वहीं, रामपुर विधानसभा सीट पर सपा का दबदबा कायम रहेगा या भाजपा का कमल खिलेगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। सामाजिक समीकरण के लिहाज से यूं तो रामपुर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। आजम खां और उनके परिवार का इस सीट पर कब्जा रहा है। इसलिए सपा रामपुर उपचुनाव में जीत के प्रति आश्वस्त है। लेकिन जानकारों का मानना है कि भाजपा ने अगर रामपुर लोकसभा उपचुनाव की रणनीति को विधानसभा उपचुनाव में भी लागू किया तो सपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
1996 से यादव परिवार के पास रही है मैनपुरी
मैनपुरी लोकसभा सीट 1996 से सपा का गढ़ रही है। मुलायम सिंह यहां से पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए। 1996 में मुलायम सिंह इस सीट से सांसद चुने गए। 1998 और 1999 में मुलायम ने अपने विरोधी रहे बलराम सिंह यादव को कांग्रेस से सपा में शामिल कराकर मैनपुरी से चुनाव लड़ाया और जिताया। 2004 में मुलायम ने मैनपुरी और संभल से चुनाव जीता था। बाद में मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ी तो उप चुनाव में यादव परिवार के ही धर्मेंद्र यादव चुनाव जीते। 2009 और 2014 में फिर मुलायम सिंह चुने गए। 2014 में मुलायम आजमगढ़ से भी जीते थे। बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ी तो तेजप्रताप यादव चुने गए। 2019 में फिर मुलायम सिंह इस सीट से सांसद चुने गए थे।
रामपुर विधानसभा क्षेत्र में आजम का रहा है दबदबा
आजम खां 1980 में पहली बार जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर रामपुर से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वे यहां से 1985 में लोकदल, 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी, 1993 में सपा से विधायक रहे। 1996 में कांग्रेस से अफरोज अली खान ने आजम की जीत के सिलसिले को तोड़ा। लेकिन 2002 से 2022 तक आजम और उनकी पत्नी तजीन फात्मा ही इस सीट से विधायक चुनी जाती रही हैं।