रायबरेली। ठंडे-गर्म मौसम के साथ ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। केजीएमयू लखनऊ में भर्ती कराए गए तीन साल की मासूम समेत दो मरीज एईएस के चपेट में आ गए हैं। जांच में पुष्टि के बाद मरीजों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 24 लोगों के ब्लड के सैंपल लेने के साथ ही सेहत की जांच की है। दोनों मरीज स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
जिले के लालगंज क्षेत्र के आर्य नगर निवासी इनाया (3) और दीनशाह गौरान क्षेत्र के कटरा निवासी नजमा (43) को समस्या होने पर पिछले सप्ताह केजीएमयू लखनऊ में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान जांच कराई गई तो मरीजों में एईएस की पुष्टि हो गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मॉस कांटेक्ट के तहत प्रभावित इलाकों में पहुंचकर एंटी लॉर्वा के छिड़काव के साथ ही लोगों को इस बीमारी से बचने के लिए जागरूक किया।
डॉ. ऋषी बागची व एम. नकवी की टीम ने लोगोंं की सेहत जांच के साथ ही कई लोगों की तत्काल जांच की। जांच में सभी लोग स्वस्थ पाए गए। हालांकि 34 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। डॉ. बागची का कहना है कि एईएस के दोनों मरीज स्वस्थ है। जांच के दौरान परिवार के लोगों में भी एईएस के लक्षण नहीं मिले।
क्या होता है एईएस
एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) को मस्तिष्क ज्वर भी कहते हैं। इससे शरीर का मुख्य नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। यह बीमारी बच्चों को मुख्य तौर पर अपना निशाना बनाती है। इस रोग का वाहक मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद चार से 14 दिन में इस रोग के लक्षण दिखने लगते हैं। एईएस से पीड़ित बच्चों में अचानक बुखार के साथ शरीर में ऐंठन होने की शिकायत होती है। ऐसे में पीड़ित को तत्काल इलाज के लिए समीप के अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण एईएस का खतरा है। इसके लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को अलर्ट किया गया है। एईएस के केस मिलने के बाद चिह्नित इलाकों में टीमें भेजकर एंटी लार्वा के छिडक़ाव के साथ अन्य लोगों की सेहत की जांच भी कराई गई है। एईएस के दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ