पिशाची मेले में झूले का लुत्फ उठाते लोग।
हनुमतनगर/ सोहावल। महात्मा भरत की तपोस्थली नंदीग्राम भरतकुंड पर दो दिवसीय ऐतिहासिक पिशाची मेला बुधवार को शुरू हो गया। इस पौराणिक मेले में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने पिशाच मोचन कुंड में डुबकी लगाई और मेले का आनंद लिया।
यह मेला प्रतिवर्ष नंदीग्राम भरतकुंड पर लगता है। यहां एक किंवदंती है कि ‘न सौ काशी, न एक पिशाची’ यानी काशी में सौ बार स्नान करने से मिलने वाला पुण्य पिशाच मोचन कुंड में एक बार स्नान से प्राप्त होता है। भरत हनुमान मिलन मंदिर के महंत परमात्मा दास ने बताया कि पौराणिक पिशाच मोचन कुंड में स्नान से समस्त पिशाचों से मुक्ति मिलती है। भरत कुंड महोत्सव न्यास के अध्यक्ष डॉ अंजनी पांडेय ने कहा कि यह धरती पुण्य के साथ-साथ त्याग और समर्पण की भावना प्रदान करती है।
सुरक्षा के लिए पूराकलंदर प्रभारी आईपीएस शुभम जैन और इंस्पेक्टर मनोज शर्मा पुलिस बल के साथ तैनात रहे। भीड़ नियंत्रण के लिए जगह-जगह बैरियर लगाए गए हैं और एक खोया पाया केंद्र भी बनाया गया है।
भरत कुंड के सभासद रामकृष्ण पांडेय ने बताया कि मेले में दुकानदारों से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।