सुबह चार बजे तेज धमाके के साथ फटी बैटरी
अंशु के मुताबिक, अंकित बुधवार रात को ई-रिक्शा लेकर घर पहुंचा। वह ई-रिक्शे के लिए दो बैटरियां ले रखी है। एक पहले से ही कमरे में था। दूसरी बुधवार रात को पहुंचने के बाद ई-रिक्शे से निकालकर कमरे में रख दिया। बृहस्पतिवार सुबह चार बजे अंकित जगा और बाथरुम चला गया। इतनी देर में तेज धमाका हुआ। वह भागकर कमरे में पहुंचा तो वहां सो रहे सभी परिजन तड़प रहे थे। दोनों बैटरियां फट गई थी। आननफानन वह सभी को लेकर चिनहट स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया। जहां रोली, रिया और कुंज ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने समर व प्रिया की हालत गंभीर बताई, वहीं अंकित को खतरे से बाहर बताया है।
मासूमों को तड़पता देख चीखा पिता
अंकित जब कमरे में पहुंचा तो वहां का मंजर देख वह चीख पड़ा। मासूम तेजाब से झुलसे चीख रहे थे। पत्नी भी बचाने के लिए पुकार रही थी। अंकित को कुछ देर तक यह समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करे। वह अपने बेटों व भतीजियों की हालत देख चीखने लगा। आसपास के लोगों ने बताया कि अचानक सुबह के समय चीखपुकार सुनकर सभी की नींद खुल गई। सभी अंकित की घर की तरफ भागे। वहां कमरे की हालत देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गया।
ओवर चार्जिंग के कारण हादसा
प्रभारी निरीक्षक बीबीडी विनय कुमार सरोज के मुताबिक हादसे की सूचना मिलने पर टीम ने पड़ताल की। शुरूआती पड़ताल में सामने आया कि दोनों बैटरियों को चार्जिंग के लिए लगाया गया। जरूरत से अधिक चार्जिंग के कारण हादसा हुआ। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
दो दिन में इलाज में खर्च हो गए चार लाख
अंशु के मुताबिक हादसे की सूचना मिलने पर जब वह पहुंचा तो चार मासूमों व भाई की पत्नी की हालत देखकर कलेजा फट गया। इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। लगातार रुपये की जरुरतों ने तोड़ दिया। दो दिन में उसे छह लोगों के इलाज के लिए चार लाख रुपये खर्च करने पड़े। अंशु को इलाज में रुपये खर्च होने से ज्यादा मासूम बच्चों को न बचा पाने का दर्द साफ दिख रहा था। वहीं दो मासूम बच्चों प्रिया व समर की हालत गंभीर बनी हुई है। उनका इलाज चल रहा है।