नरेश शर्मा, लखनऊ। शहर के 20 बिजली उपकेंद्र ट्रांशमिशन उपकेंद्र से सिंगल स्रोत से बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में लाइन में फॉल्ट आने पर संबंधित उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को घंटों बिजली की समस्या से जूझना पड़ता है। गोमतीनगर व चिनहट क्षेत्र के लौलाई, मंत्री आवास, विपिन खंड, विराज खंड, ग्वारी कलवर्ट उपकेंद्र के उपभोक्ता पिछले कई साल से बिजली संकट झेल रहे हैं। इन्हें समस्या के निजात दिलाने के लिए 72.50 करोड़ रुपये से बड़ा 220 केवी सतरिख रोड ट्रांसमिशन उपकेंद्र बनाया गया। यह ट्रांसमिशन उपकेंद्र पिछले साल दिसंबर से चालू हो गया है, जो डबल स्रोत सप्लाई देने के लिए तैयार है, लेसा की ओर से 33 केवी लाइन न बनाए जाने के कारण इस ट्रांसमिशन उपकेंद्र का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इंजीनियरों ने डबल स्रोत सप्लाई की लाइन बनाने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर उच्च अफसरों को भेजा, लेकिन इन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी तरह लेसा सिस गोमती जोन में भी ऐशबाग, वैद्य स्टील, तालकटोरा, अपट्रान, मानसरोवर 33/11 केवी उपकेंद्र भी सिंगल स्रोत आपूर्ति पर निर्भर हैं। इन सभी को वैकल्पिक लाइन से बिजली मिलने लगे तो करीब पांच लाख की आबादी को बिजली समस्या से राहत मिल जाए।
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एकल स्रोत से आपूर्ति का साइड इफेक्ट
अगस्त में पांच घंटे झेला था बिजली संकट
चिनहट खंड के 33/11 केवी लौलाई उपकेंद्र को मलेशेमऊ ट्रांसमिशन उपकेंद्र से सिंगल स्रोत 33 केवी सप्लाई है। इससे अगस्त में केबल फॉल्ट आने से 7500 उपभोक्ताओं को पांच घंटे तक बिजली संकट झेलना पड़ा था। लौलाई में डबल स्रोत से सप्लाई होती तो उपभोक्ताओं को यह परेशानी न उठानी पड़ती।
कहने को विकल्प, पर आधा घंटे नहीं चलती बिजली
33/11 केवी उपकेंद्र ऐशबाग को टिकैत राय तालाब ट्रांसमिशन उपकेंद्र से सिंगल स्रोत पर मुख्य रूप से बिजली मिलती है। कहने के लिए इस उपकेंद्र को डबल स्रोत के नाम पर अमीनाबाद जाने वाली भूमिगत लाइन से बीच में जोड़ लिया है। इमरजेंसी में आधा घंटे भी 80 हजार आबादी की बिजली नहीं चल पाती है।
चेयरमैन, एमडी की भी सिंगल स्रोत सप्लाई
विपिनखंड उपकेंद्र पर भी सिंगल स्रोत बिजली सप्लाई है, जबकि इस उपकेंद्र इलाके में यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन, एमडी व विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन सहित काफी तादाद में वीआईपी रहते हैं। डबल स्रोत के नाम पर इमरजेंसी के लिए दूसरे उपकेंद्र से विपिनखंड को जोड़ रखा है।
एक दूसरे उपकेंद्र ने फंसाई कटिया
राजभवन के बाद वीआईपी उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई करने वाला गोमतीनगर दूसरा खंड है। गोमतीनगर खंड के चार 33/11 केवी उपकेंद्र मंत्री आवास, विराज खंड, ग्वाली कलवर्ट, विपिन खंड हैं। ऐसे उपकेंद्रों ने डबल स्रोत के नाम पर एक-दूसरे उपकेंद्र आपस में कटिया फंसा कर (इंटरलिंक) कामचलाऊ व्यवस्था बना ली है। इनमें मंत्री आवास उपकेंद्र अतिरिक्त ट्रांसमिशन उपकेंद्र से डबल स्रोत की बिजली सुविधा से विहीन है।
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अभी से अभियंता व कर्मी पसीने-पसीने
शहर के जिन-जिन 33/11 केवी उपकेंद्रों पर सिंगल स्रोत की बिजली सप्लाई है, वहां के अभियंता एवं कर्मी यह सोच कर अभी से पसीने-पसीने हो रहे हैं कि आने वाली गर्मी में बिजली कैसे चलेगी बिजली। अभियंताओं का कहना डबल स्रोत लाइनें नहीं बनीं तो गर्मी में जनता भी पसीने-पसीने होगी।
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क्या होता है डबल स्रोत
33 केवी उपकेंद्र पर डबल स्रोत का मतलब दो अलग-अलग ट्रांसमिशन उपकेंद्र से 33 हजार वोल्ट की बिजली सप्लाई का नेटवर्क है। इससे एक ट्रांसमिशन उपकेंद्र की सप्लाई में फॉल्ट आने पर दूसरे स्रोत से बिजली चालू कर दी जाती है। -
बिजनेस प्लान में शामिल है प्रस्ताव
प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ भवानी सिंह खंगारौत के मुताबिक उपकेंद्रों को डबल स्रोत से बिजली सप्लाई के लिए प्रस्ताव बनाए गए हैं। ये प्रस्ताव बिजनेस प्लान 2023-24 में मंजूरी के लिए शामिल किए गए हैं। मंजूरी मिलने पर लाइन बनाने का कार्य शुरू होगा।