भूमिपूजन के मुहूर्त पर सवाल उठाने वाले ज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु स्वरूपानंद सरस्वती समेत तमाम विद्वानों को ट्रस्ट ने वास्तुपूजा के जरिए जवाब दिया है। ज्योतिषी कहते हैं कि 3 अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन कराई गई वास्तु पूजा मंदिर निर्माण की सबसे अहम पूजा थी। इसके जरिए ट्रस्ट ने पांच अगस्त के मुहूर्त का खतरा टाल दिया है।
भारतीय विद्या भवन में ज्योतिषाचार्य सचिन मल्होत्रा कहते हैं कि 5 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट 8 सेकंड पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास संपन्न किया तो उस समय अयोध्या के स्थानीय समयानुसार तुला लग्न और वृषभ नवांश उदय हो रहा था।
भाद्रपद के महीने की कृष्ण पक्ष द्वितीय तिथि तथा चौमासे के कारण मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार यह समय भूमि पूजन और शिलान्यास के लिए उचित नहीं हैं, किंतु इस शिलान्यास से पूर्व वास्तु पूजन का आयोजन 3 अगस्त प्रात: 9 बजकर 30 मिनट पर चंद्रमा के अतिशुभ श्रवण नक्षत्र में रहते पूर्णिमा के दिन किया गया था तो इससे शिलान्यास मुहूर्त के कुछ दोष कम को जाते हैं, शिलान्यास मुहूर्त के समय चंद्रमा के कुंभ राशि में राहु के शतभिषा नक्षत्र में होने तथा शनि-मंगल के बीच पाप-कर्तरी दोष में फंसने के कारण आने वाले कुछ महीनों में देश पर प्राकृतिक प्रकोपों और युद्ध के कारण कोई संकट आ सकता है। किंतु राम मंदिर के वास्तुपूजा के समय शुक्र की होरा चल रही थी और लग्न व नवांश भी शुभ ग्रह शुक्र का ही था। इसलिए मंदिर निर्माण लंबी अवधी में राष्ट्र के लिए शुभ होता प्रतीत हो रहा है।