जन्म के इतिहास की नहीं जानकारी
गांव के लोग बताते हैं कि यह पेड़ कब से गांव में है, इसकी जानकारी हमारे पिता व बाबा तक को नहीं है। हम लोग जब से पैदा हुए तब से पेड़ को इसी तरह ही देख रहे हैं। खास ये कि हर वर्ष जब फसल आती है तो इस पेड़ में चाहे चार-पांच फल ही आएं, पर आते जरूर हैं।
पूर्व प्रधान पति मनोज यादव ने बताया कि एक बार कूड़ा प्लांट के निर्माण के समय यह पेड़ उसकी चपेट में आ रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने संघर्ष कर इसे बचा लिया। इसके बाद जन प्रतिनिधियों से कह कर इसे संरक्षित कराया गया। इस पेड़ को विरासत का दर्जा भी मिला है।
डीएम ने किया ऐतिहासिक पेड़ का पूजन
लखनऊ के जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार रविवार को दशहरी गांव पहुंचे और 300 साल पुराने इस पेड़ का विधिवत पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि तीन सदी पुराना यह पेड़ दशहरी आम की किस्म का जनक है। इसी से दशहरी की उत्पत्ति मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि मलिहाबाद को आम के लिए ही जाना जाता है। यहां दो लाख 70 हजार हेक्टेयर में दशहरी आम की बाग हैं, जिसमें 60 प्रतिशत कलमी दशहरी का क्षेत्र है। उन्होंने यह भी बताया कि राजधानी में आम महोत्सव शुरू होने जा रहा है। इसमें आम संबंधी फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने वाली योजनाओं का प्रचार किया जाएगा। अलीगंज में आम किसानों के लिए एक फैसिलिटेशन सेंटर बन रहा है, जो ट्रेडिंग व एक्सपोर्ट का बिजनेस करने वालों के लिए बेहद फायदेमंद होगा।