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Train Accident : एयरपोर्ट पर यात्रियों ने बयां किया खौफनाक मंजर, कहा आंख खुली तो आग के रूप में मौत नजर आई

Sun, 27 Aug 2023 10:26 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

विमान के आने का समय दोपहर दो बजे था लेकिन इससे पहले ही उनके परिजन एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। विमान के आने की सूचना मिलते ही यात्रियों का निकलना शुरू हुआ तो पीड़ित परिवारों के सदस्य अपनों की एक झलक पाने के लिए व्याकुल हो गये और अधिकारियों के साथ ही वह भी एयरपोर्ट के गेट की तरफ दौड़ पड़े।
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पीड़ित यात्री - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मदुरै ट्रेन हादसे के चश्मदीद रविवार को चौधरी चरण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे तो घटना बताते हुए सिसक पड़े। उन्होंने कहा कि सुबह आंख खुली तो आग के रूप में मौत नजर आई। लखीमपुर-खीरी की रहने वाली कमला देवी वर्मा ने बताया कि हम सो रहे थे। सुबह सवा पांच बजे का समय था और डिब्बे के दरवाजे खिड़कियां अंदर से बंद थे। कोच में धुआं और आग फैलने लगी तो हम लोग दरवाजे की ओर भागे। हम तो बच गए, लेकिन साथ लाया सारा सामान जलकर राख हो गया। 

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सीतापुर की सुशीला सिंह ने बताया कि वह बीच वाली सीट पर थी। आग लगी तो हम दरवाजे के पास पहुंचे। दरवाजा लॉक था और खुल नहीं रहा था। लोग घबरा गए, लेकिन फिर किसी तरह दरवाजा खोलकर बाहर निकले। करीब तीन फिट ऊॅचाई से कूदने पर काफी चोटें आई है। सीतापुर के शिवप्रताप सिंह चौहान ने बताया कि उनके कोच के अंदर काफी धुआं और आग थी। किसी तरह चार लोगों को लाद कर बाहर निकाल लिया, लेकिन अपनी पत्नी मिथिलेश कुमारी और बहनोई शत्रुदमन सिंह को नहीं निकाल पाए। इस हादसे में दोनों की मौत हो गई। राजधानी के गोमतीनगर में रहने वाली सीता सिंह ने बताया कि उनकी आँख खुली तो डिब्बे में अंधरे के साथ आग की लपटें उठ रही थी। हम लोग सारा सामान छोडकर वहां से भागे तो गेट में ताला पड़ा था। हमारे साथ मौजूद एक व्यक्ति ने वहीं रखी लोहे की राड से ताला तोड दिया और हम लोग कूद कर नीचे आए। 

इसके चंद मिनट बाद ही गैस सिलेण्डर फट गया। तब हमारी ट्रेन के बगल खड़ी दूसरी ट्रेन में भी आग लग गई। हरदोई की रहने वाली किरन गुप्ता ने बताया कि काफी तेजी से धुआं आया और देखते ही देखते अंधेरा हो गया। डिब्बे के अन्दर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। किसी तरह दरवाजे पर पहुंची और जान बचाने के लिए नीचे कूद गई। लोगों के बीच चीख पुकार मची थी। ट्रेन हादसे के चश्मदीद राम मनोहर वर्मा ने बताया कि हम सो रहे थे। जैसे ही हमने चीखें सुनीं तो बाहर भागने की कोशिश की। लेकिन दरवाजा बंद था। मैं ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था। अंदर बस भगवान का नाम ले रहा था। उसी वक्त किसी ने ताला तोड़ दिया और हम बाहर आए। इसके 15-20 मिनट बाद रेलवे कर्मचारी वहां पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश करने लगे।

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17 को लखनऊ से गई थी ट्रेन

पीड़ित यात्री को सांत्वना देते ब्रजेश पाठक - फोटो : amar ujala
टूरिस्ट स्पेशल कोच को 17 अगस्त को लखनऊ से रवाना किया गया था। कोच में 72 में से 61 लोगों के लिए सीतापुर की भसीन टूर एंड ट्रैवेल्स द्वारा टिकट बुक किए गये थे। बाकी यात्री लखनऊ और आसपास के स्टेशनों से सवार हुए थे। ये सभी रामेश्वरम की यात्रा पर गए थे। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस कोच को नागरक्वायल जंक्शन पर 25 अगस्त को ट्रेन संख्या 16730 (मदुरै-पुनालुर एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। शनिवार तड़के 03:47 बजे ट्रेन के मदुरै स्टेशन पहुंचने पर कोच को अलग कर दूसरी लाइन पर खड़ा कर दिया गया। इस दौरान कुछ लोग ट्रेन में अवैध रूप से ले जाए गए एलपीजी गैस सिलेंडर और चूल्हे से चाय-नाश्ता बनाने लगे। तभी सिलेंडर फट जाने से कोच में आग लग गई। इस कोच को ट्रेन संख्या 16824 से रविवार को चेन्नई जाना था और 28 अगस्त को लखनऊ वापस आना था।

अपनों को लेने पहुंचे घर वाले
विमान के आने का समय दोपहर दो बजे था लेकिन इससे पहले ही उनके परिजन एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। विमान के आने की सूचना मिलते ही यात्रियों का निकलना शुरू हुआ तो पीड़ित परिवारों के सदस्य अपनों की एक झलक पाने के लिए व्याकुल हो गये और अधिकारियों के साथ ही वह भी एयरपोर्ट के गेट की तरफ दौड़ पड़े। केन्द्रीय औद्योगिक बल के जवानों ने उन्हें गेट के बाहर ही रोक दिया। गोमतीनगर में रहने वाली सीता सिंह भी इस हादसे के दौरान ट्रेन में मौजूद थी। उनका बेटा मोहित सिंह उन्हें लेने आया था। मोहित ने बताया कि उन्हें टीवी न्यूज से घटना की जानकारी हुई तो तुरंत मां को फोन मिलाया। फोन रिसीव नहीं हुआ तो घबरा गया। कुछ देर बाद ही उनकी मां ने फोन कर अपनी कुशलता बताई और हादसे की जानकारी दी। इस ट्रेन हादसे में हरदोई के रहने वाले परमेश्वर दयाल गुप्ता की मौत हो गई। उनके परिजन उनका शव लेने एयरपोर्ट पंहंचे थे। पीड़ित परिवार ने बताया कि सुबह उन्हें घटना की जानकारी हुई। उन्हें फोन किया गया तो बंद था। इसके बाद वह रेलवे व टै्रवल्स एजेन्सी में फोन करते रहे, लेकिन उन्हें कोई सही जानकारी नही मिली। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे उनकी मौत होने की खबर मिली। जबकि सीतापुर के रहने वाले शिवप्रताप सिंह चौहान अपनी पत्नी मिथलेश, बहन सुशीला सिंह व बहनोई शत्रुदमन सिंह के साथ तीर्थ यात्रा पर गये थे। रूद्र प्रताप सिंह चौहान के करीब आधा दर्जन परिजन उन्हें लेने आए थे। इस हादसे मे जान गंवाने वाली मिथलेश सिंह की बहन इंदु सिंह ने बताया कि सुबह फेसबुक देख रही थी। तभी उनके बहनोई रूद्र प्रताप सिंह चौहान ने हादसे की जानकारी देते हुए लिखा कि मैने चार लोगों की जान बचाई, पर पत्नी और बहनोई को नहीं बचा सका। उन्होंने कहा कि इस हादसे में भगवान ने उनसे उनकी बहन छीन ली। यात्रियों के एयरपोर्ट से बाहर आने तक वह अपने परिजनों को ही निहारती रही।
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लखनऊ के आलमबाग निवासी सूरज व रेनू बख्शी का परिवार कर रहा ईश्वर का धन्यवाद

मौके पर पहुंचे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक - फोटो : amar ujala
ईश्वर की कृपा है कि मम्मी-पापा सकुशल लौट रहे हैं। हमारे लिए ये किसी दिवाली से कम नहीं, ईश्वर का जितना भी धन्यवाद करें कम है। ये कहते हुए अंकित की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। रूंधे गले से उन्होंने मम्मी-पापा से हुई बातचीत विस्तार से बताना शुरू किया। रविवार रात दोनों की वापसी हुई। आलमबाग निवासी अंकित ने बताया कि पापा रिटायर हैं और एक छोटी सी दुकान संभालते हैं और वे प्राइवेट जॉब करते हैं। अंकित ने बताया कि शनिवार सुबह 9.30 बजे ही मम्मी-पापा के सुरक्षित होने का समाचार मिल चुका था। मम्मी-पापा का मोबाइल फोन ट्रेन में ही छूट गया था। मम्मी को नानी का नंबर याद था। मम्मी ने उन्हें फोन किया और नानी ने हमें सूचना दी। इसके बाद मैंने मम्मी से बात की। अंकित ने कहा कि मम्मी तो अक्सर घूमने व तीर्थयात्रा पर जाती रहती हैं। इस बार उन्होंने पापा के साथ जाने की योजना बनाई थी।

इनके शव लाए गए
हरदोई के परमेश्वर कुमार गुप्ता (55), सीतापुर के शत्रु दमन सिंह (65), अंकुल कश्यप (36), दीपक कश्यप (20), हरीश कुमार भसीन (60), मिथिलेश कुमारी (62), लखीमपुर-खीरी की शांति देवी वर्मा (57) और लखनऊ की हिमानी बंसल (22) व मनोरमा अग्रवाल (82)।

सरकार पीड़ितों के साथ
एयरपोर्ट पर मौजूद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस कठिन घड़ी में प्रदेश सरकार हादसे के पीड़ितों के साथ खड़ी है। सरकार द्वारा घायलों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों के साथ ही शवों को एम्बूलेंस के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। रेलवे ने मृतक आश्रितों के लिए 10-10 लाख और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने मृतक आश्रितों को तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
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