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समय से इलाज मिलता तो बच सकती थी सीओ की जान

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लखनऊ। हरदोई में तैनात डिप्टी एसपी नागेश कुमार मिश्रा रविवार को कोराना से जंग हार गए। उन्हें अगर समय से इलाज मिलता तो शायद उनकी जान न जाती। हरदोई में ड्यूटी के दौरान जब नागेश को कोरोना के हल्के लक्षण दिखाई दिए तो उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराया, लेकिन पांच दिनों तक उसकी रिपोर्ट ही नहीं आई। हरदोई में पूर्व में तैनात रहे त्रिगुण बिशेन जो अब डीजीपी मुख्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था के यहां स्टाफ अफसर हैं, उन्होंने उनसे संपर्क किया। बिशेन ने वहां के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से संपर्क कर उनके सैंपल की रिपोर्ट तलाश कराई, लेकिन सैंपल नहीं मिला। दिन प्रतिदिन नागेश की तबियत बिगड़ती ही जा रही थी। बिना कोरोना टेस्ट के कोई डॉक्टर हाथ लगाने को तैयार नहीं था। डीजीपी मुख्यालय के अधिकारी के हस्तक्षेप के चलते पांच दिन बाद उनका दोबारा सैंपल लिया गया। जांच हुई और कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तब तक उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ चु़की थी। उन्हें फौरन लखनऊ में पीजीआई में भर्ती कराया गया, लेकिन शायद तब तक कोराना का संक्रमण नागेश के शरीर में काफी अधिक फैल चुका था और उन्होंने रविवार की सुबह दम तोड़ दिया।
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