लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद के तीन सिपाहियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। लखनऊ के बक्शी का तालाब थाने से संबंधित हिरासत में मौत का यह मामला वर्ष 2000 का था। इसमें लखनऊ की सत्र अदालत ने बीते मार्च में तीनों को हत्या के जुर्म में जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तीनों ने अपील दाखिल कर जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया था। कोर्ट ने कहा पहली नजर में यह जमानत का मामला नहीं बनता है।
न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा, न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खां की खंडपीठ ने यह आदेश सिपाहियों अवध नाथ चौहान, राम प्रभाव शुक्ला और गुलाब चंद्र की जमानत अर्जियों पर दिया। जमानत अर्जियों का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम उमेश वर्मा का कहना था 23/24 अगस्त 2000 को पूछताछ के लिए थाने के सिपाहियों ने वीरेंद्र को पकड़ लाकअप में बंद कर दिया। कहा, उसे छोड़ने के लिए सिपाहियों ने रिश्वत मांगी।
कुछ पैसा पाने के बावजूद बाकी न मिलने पर हिरासत में उसे पीटा और गला घोंटने से जब उसकी मृत्यु हो गई तो थाना परिसर में फंदा लगाकर आत्महत्या करने का मामला बता दिया। उधर, सिपाहियों की ओर से कहा गया कि घटना के समय वे थाने पर मौजूद ही नहीं थे। कोर्ट ने कहा, मृतक के गले में पड़े निशान से गला घोंटने की राय व्यक्त की गई है, न कि आत्महत्या करने की। ऐसे में पहली नजर में यह जमानत का मामला नहीं बनता है।