लखनऊ। थियेटर उस सागर की भांति है जिसमें सभी नदियां समाहित हैं। थियेटर वास्तव में इंसान की भावनाओं से जुड़ा है। थियेटर में अभिनेता व दर्शक सीधे मिलते हैं। यह कहना है था गोमतीनगर के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में अभिनेत्री मीता वशिष्ठ का। इस दौरान उन्होंने शुक्रवार से शुरु हो रहे कबीर फेस्टिवल में होने वाले नाटक लाल देह के मंचन की जानकारी दी।
मीता ने बताया कि नाटक का मंचन वह 20 सालों से करती आ रही हैं। कहा कि उन्होंने कड़ी तपस्या की है। कई सालों तक लगातार कई उपन्यास पढ़े, कई महान लोगों से बातचीत के बाद उन्होंने यह नाटक लिखा। इस नाटक को हर बार देखना नया होता है। कहा कि मैं दर्शकों को बुलाती नहीं हूं। वह खुद ही खिंचे चले आते हैं। नाटक अंग्रेजी, हिंदी और कश्मीरी भाषा में है। बताया कि वह इस नाटक के दौरान दर्शकों से बातचीत भी करेंगी।
उन्होंने कहा कि लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें, यहां की संस्कृति गजब है। सोशल मीडिया रील्स पर उन्होंने कहा कि थियेटर व सिनेमा की तुलना इन रील्स से बिल्कुल नहीं की जा सकती है।