लखनऊ। दो पीढ़ियों के टकराव की कहानी संक्रमण ने दर्शकों को सीख दी कि समय एक जैसा नहीं रहता, स्थितियां बदलती रहती हैं। हमें हमारे परिवार को महत्व देना चाहिए और बड़े बुजुर्गों का आदर करना चाहिए।
मौका था, संगीत नाटक अकादमी व रंग संगम संस्था की ओर से आयोजित समारोह का। कहानी मंचन में दो पीढ़ियों के द्वंद्व को दर्शाया गया। इस कहानी में तीन पात्र हैं पिता, बेटा और मां। पिता ने अपने पूरे जीवन की जमापूंजी लगाकर अपने रिटायरमेंट से पहले घर बनवा दिया, ताकि बच्चों को उनके जाने के बाद कोई दिक्कत न हो।
वहीं दूसरी ओर उनका बेटा पिन्टू है कि उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उनके पिता के संक्रमण पिंटू में आ जाते है। बेटा अपने पिता की जिन चीजों को मना करता था, अब वह खुद करने लगता है। उसकी मां ये सब देखकर बहुत हैरान है।
लोकनृत्य के रंगों ने मोहा मन
वहीं दूसरी ‘लोकनृत्य के रंग’ नाम से हुए आयोजन में ढेढ़िया, कजरी, कहरवा नृत्य प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया। कजरी का गायन उत्तर प्रदेश के बनारस, मिर्जापुर, मथुरा, इलाहाबाद और बिहार के भोजपुर में सावन में किया जाता है। कहरवा नृत्य दादरा शैली का एक लोकप्रिय नृत्य है जो लखनऊ के दरबारी नर्तकों में बहुत लोकप्रिय था, इसमें प्रमुख भाव शृ़ंगार का होता है।